उज्जैन: स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त से महाकाल की नगरी में 100 इलेक्ट्रॉनिक सिटी बसें चलाई जाने की तैयारी शुरू हो गई है, प्रथम चरण में 25 बसें सड़कों पर उतारी जाएगी इसके लिए डिपो को भी तैयार किया जा रहा है. हाल फिलहाल सभी बसें पीथमपुर की आइसर कंपनी में खड़ी है.
मुंबई की ग्रीनसेल मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को इलेक्टि्रक बसों के संचालन के लिए एलओयू जारी हो चूका है. विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी को ही बस संचालन की जिम्मेदारी देते हुए सीईओ नियुक्त किया गया है. खास बात यह है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण लगभग 15 से अधिक सड़कें सिंहस्थ के तहत बना रहा है. वहीं अब सिटी बस संचालन की जिम्मेदारी भी प्राधिकरण के सीईओ के जिम्मे में कर दी गई है.
इस बार महापौर हुए अलग
नगर निगम के माध्यम से सिटी बस चलाई जाने की कोशिश 2010 से ही शुरू की गई है, कई बार यह योजना बे-पटरी हो गई और एक-एक करके सिटी बस कबाड़ होती चली गई. करोड़ों का भ्रष्टाचार भी हुआ, जाँच भी हुई, नतीजा सिफर रहा. अब एक बार फिर सिंहस्थ 2028 के पहले 100 इलेक्ट्रॉनिक सिटी बस से चलाई जाने की कवायद की जा रही है. अबकी बार उज्जैन नगर निगम के महापौर मुकेश टटवाल को कंपनी में नहीं रखा गया है. बस कंडक्टर यूसीटीएसएल उपलब्ध कराएगा, किराये और विज्ञापन से होने वाली आय पूरी तरह यूसीटीएसएल की होगी.
बस खरीदी में सब्सिडी
यह सारी बसें 40 प्रतिशत सब्सिडी और वायबिलिटी गैप फंड के मॉडल पर ग्रीन सेल कंपनी द्वारा खरीदी जा रही है, जिससे निगम पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा. प्रारंभिक योजना के तहत बसों का संचालन शहर के विभिन्न रूट्स पर होगा. साथ ही 12 बसें विशेष रूप से उज्जैन दर्शन सेवा के लिए आरक्षित रहेंगी.
डिपो में हो रहा कायाकल्प
मक्सी रोड स्थित सिटी बस डिपो और कार्यालय परिसर में इन दिनों व्यापक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं. डिपो से जुड़े अधिकांश कार्य पूरे होने की स्थिति में हैं. उज्जैन सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड के सीईओ संदीप सोनी भी इस परियोजना को गति देने के लिए लगातार अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे हैं.
सड़कों पर निर्माण और खुदाई
हालांकि शहर में कई स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण, निर्माण और सौंदर्यीकरण के कार्य चल रहे हैं. जगह-जगह खुदाई और ट्रैफिक डायवर्जन के कारण शुरुआती दौर में बस संचालन को लेकर कुछ व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं. इसके बावजूद प्रशासन स्वतंत्रता दिवस से सेवा शुरू करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है.
श्रद्धालुओं और पर्यटकों को राहत
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं. वर्तमान में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच सुगम सार्वजनिक परिवहन की कमी महसूस की जाती है. सिटी बस सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को कम खर्च में सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलेगा. इससे निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और शहर के यातायात दबाव में भी कमी आएगी.
सिंहस्थ की तैयारी का अहम हिस्सा
सिटी बस परियोजना को केवल परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन आएंगे. ऐसे में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है. सिटी बसें भविष्य में सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.
