केन्द्र व राज्य सरकार कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए संयुक्त प्रयास करें

जबलपुर। कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत हो चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी है। याचिका में कहा गया है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के द्वारा निर्धारित मापदंड का पालन नहीं किया जाने के कारण बाघों की मौत में इजाफा हुआ है। हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस बीपी शर्मा की युगल पीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए केन्द्र व राज्य सरकार को निर्देशित है कि बाघों की सुरक्षा के लिए निवारक और उपचारात्मक उपायों करें। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए डॉग के कोरेंटाइन किया जाये। युगलपीठ ने निर्धारित मापदंड के परिपालन तथा दिये गये निर्देश के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गयी है।

मुम्बई के चेम्बूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में लगातार बाघों की मौत हो रही है। अप्रैल माह में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन टी-122 (सुनैना) और बाघिन टी-141 (अमाही) तथा उसके चार अर्धवयस्क शावक की मौत हो गयी। रिपोर्ट के अनुसार मौतों से पहले उनकी शारीरिक स्थिति में स्पष्ट गिरावट देखी गयी गयी। इन मौतों का कारण संदिग्ध कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीव्ही ) माना गया। एक और युवा नर बाघ टी-220 (“महावीर”) की भी 19 मई 2026 को मृत्यु हो गई, उसकी मृत्यु का कारण संभावित सीडीव्ही बताया गया है। इसी समय-सीमा के दौरान दो वयस्क नर बाघों की बालाघाट और किसली क्षेत्रों में मृत पाए गए। अकेले कान्हा टाइगर रिजर्व में ही एक महीने के समय में आठ वाघों की मौत हुई है।

याचिका में कहा गया था कि कान्हा टाइगर रिजर्व में प्रायलुप्त रॉयल बंगाल टाइगर की आबादी की सुरक्षा करना है। इसके लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 ,प्रोजेक्ट टाइगर व एनटीसीए दिशानिर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं के तहत बाघों की मौतों की वैज्ञानिक निगरानी, रोग निगरानी और जांच को नियंत्रित करने वाले वैधानिक और प्रशासनिक ढांचे का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए बाध्यकारी मानक और परिचालन निर्देशों का पालन करना है। जिनमें निगरानी, रोग निगरानी, पशु चिकित्सा सेवाएँ, और “अविभाज्य” मुख्य आवासों के प्रबंधन से संबंधित निर्देश शामिल हैं।

याचिका में कहा गया है कि टाइगर रिजर्व के भीतर सीटीव्ही से बाघों की मृत्यु होने के बावजूद भी वर्तमान जारी है। इसके बावजूद भी निगरानी, जैव-सुरक्षा और इंटरफेस-प्रबंधन उपायों की पूर्ण प्रकृति, सीमा और कार्यान्वयन की स्थिति के संबंध में कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। निर्धारित प्रोटोकॉल के दिशानिर्देशों वैधानिक दायित्वों के अनुरूप बनाये गये है। याचिका में राहत चाही गयी है कि निवारण और निगरानी संबंधी उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाये। याचिका में केंद्रीय पर्यावरण सचिव, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण,प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक तथा डायरेक्टर कान्हा टाइगर रिजर्व को अनावेदक बनाया गया है। याचिका की सुनवाई करते हुए युगल पीठ ने उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह तथा तथा अधिवक्ता प्रतीक रूसिया ने पैरवी की।

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