मुंबई, 23 जून (वार्ता) महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को समान नागरिक संहिता, तीन तलाक और बहुविवाह के मुद्दों पर तीखी वैचारिक बहस देखने को मिली जिसने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया ।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक देवयानी फरांदे की ओर से लाये गये ध्यानाकर्षक प्रस्ताव के दौरान शुरू हुई इस बहस में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। इस दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एपी) ने सरकार के रुख से अलग रुख अपनाया।
सुश्री फरांदे ने नासिक में तीन तलाक के एक हालिया मामले का हवाला देते हुए राज्य सरकार से समान नागरिक संहिता लागू करने की समयसीमा पर सवाल पूछा। उन्होंने कहा, “तीन तलाक और बहुविवाह जैसी प्रथाओं के कारण मुस्लिम महिलाओं को घोर अन्याय का सामना करना पड़ रहा है। जब पाकिस्तान ने भी बहुविवाह पर प्रतिबंध लगा दिया है, तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?”
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब राकांपा(एपी) की विधायक सना मलिक ने इस तर्क का विरोध करते हुए कहा कि उनका समुदाय कुरान का पालन करता है। सुश्री मलिक ने कहा, “आप पाकिस्तान का हवाला दे रहे हैं, लेकिन उन्होंने केवल वही लागू किया है जो कुरान में निर्देशित है। हमारी मांग है कि भारत भी कुरान के कानूनों को लागू करे। हम कुरान को मानते हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि बहुविवाह केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है।
उनकी इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) के सदस्यों ने तुरंत भारी हंगामा शुरू कर दिया। विधायकों ने उन्हें बीच में टोकते हुए कहा, “हमें कुरान पर भाषण न दें। यह देश डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान से चलता है, कुरान से नहीं।”
हंगामा बढ़ता देख राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने सुश्री मलिक का समर्थन करते हुए हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि यह संसदीय परंपरा है कि हर सदस्य को अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए, चाहे वह बहुमत के विचारों से मेल खाती हो या नहीं।
इस बहस को शिवसेना (शिंदे गुट) की नेता मनीषा कायंदे ने और तेज कर दिया, जिन्होंने लव जिहाद और तीन तलाक का मुद्दा उठाते हुए एक पीड़िता की आपबीती सुनायी, जिसे कथित तौर पर तीन बच्चों के साथ छोड़ दिया गया था। इसके जवाब में गृह राज्य मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार ऐसी प्रथाओं की सभी पीड़िताओं को सुरक्षा और न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सदन के भीतर भाजपा और अजीत पवार गुट के बीच खुलकर सामने आया यह मतभेद महायुति गठबंधन में चल रही खींचतान को दर्शाता है। यह स्थिति समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार के विधायी एजेंडे के लिए एक चुनौती बन सकती है।
