वॉशिंगटन | अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ‘एयर फोर्स टू’ पर दिए एक विशेष इंटरव्यू में मध्य-पूर्व को लेकर बाइडन प्रशासन की पिछली नीतियों से हटकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब अतीत की सैन्य गलतियों को दोहराने के मूड में नहीं है और भविष्य में किसी भी ‘अंतहीन युद्ध’ का हिस्सा नहीं बनेगा। वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिकी जनता के हितों की रक्षा करना और देश को लंबे क्षेत्रीय संघर्षों से दूर रखना है। हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है, लेकिन वर्तमान प्रशासन ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है।
उपराष्ट्रपति ने आगाह किया कि भले ही अमेरिका शांति चाहता है, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सभी सैन्य विकल्प अभी भी मेज पर मौजूद हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य कार्रवाई का उपयोग केवल अंतिम विकल्प के रूप में होगा और यह पूरी तरह ईरानी शासन के व्यवहार पर निर्भर करेगा। वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई सैन्य कदम उठाया जाता है, तो वह पिछले युद्धों की तरह दशकों तक नहीं चलेगा, बल्कि एक सटीक और सीमित ऑपरेशन होगा। जिनेवा में जारी वार्ताओं के बीच अमेरिका अब सैन्य शक्ति और कूटनीति के बीच एक बारीक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
इराक युद्ध का हिस्सा रह चुके जेडी वेंस ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अमेरिका को अपनी पिछली विफलताओं से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि मध्य-पूर्व में दो दशकों से अधिक की सैन्य मौजूदगी के बाद अब समय आ गया है कि अमेरिका अपने विदेशी हस्तक्षेप को सीमित करे। हालांकि उन्होंने इजरायल को एक प्रमुख रणनीतिक सहयोगी बताया, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि क्षेत्रीय स्थिरता की जिम्मेदारी अब केवल अमेरिका के कंधों पर नहीं होनी चाहिए। इस नई विदेश नीति का मुख्य केंद्र बिंदु अमेरिकी संसाधनों को सुरक्षित रखना और वैश्विक मंच पर अधिक सतर्कता के साथ कदम बढ़ाना है।

