
बेगमगंज। क्षेत्र की करीब एक लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला सिविल अस्पताल इन दिनों डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि अस्पताल में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रायसेन, भोपाल या सागर रेफर करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
लगातार हो रहे स्थानांतरण और अटैचमेंट के कारण अस्पताल में स्वीकृत पदों के मुकाबले कर्मचारियों की संख्या कम होती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में 8 डॉक्टरों की पदस्थापना की है, जिनमें बेगमगंज के लिए 5, सुल्तानगंज के लिए 2 और सीएचसी बेरखेड़ी बरामदगढ़ी के लिए एक डॉक्टर शामिल हैं। इनमें से अभी तक बेगमगंज में दो और सुल्तानगंज में एक डॉक्टर ने ही ज्वाइन किया है, जबकि बेरखेड़ी में पदस्थ डॉक्टर ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।
बेगमगंज में डॉक्टरों के स्वीकृत 8 पदों में से अभी भी तीन पद खाली हैं। वहीं दो डॉक्टरों के गैरतगंज सिविल अस्पताल में अटैच होने से पद रिक्त पड़े हैं। अस्पताल में चार विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल एक विशेषज्ञ डॉक्टर ही पदस्थ है। विशेषज्ञों की कमी के कारण सोनोग्राफी सहित कई सुविधाएं प्रभावित हैं और मरीजों को जांच के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
लैब टेक्नीशियन के सभी पद खाली होने से जांच व्यवस्था पर संकट खड़ा हो गया है। स्वीकृत चार पदों में से एक पद पहले से रिक्त था, जबकि अन्य कर्मचारी स्थानांतरण, अटैचमेंट और अवकाश के कारण उपलब्ध नहीं हैं। अब अस्पताल की लैब में कोई कर्मचारी नहीं बचा है, जिससे मरीजों की खून सहित अन्य जांचें प्रभावित होने की आशंका है।
स्टाफ नर्सों के 20 स्वीकृत पदों में से 13 पद भरे हैं, जबकि कुछ कर्मचारी अटैचमेंट पर हैं। रेडियोग्राफर के पद भी प्रभावित हैं। फार्मासिस्ट सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी के कारण व्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है।
सुल्तानगंज क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। यहां तीन डॉक्टरों के स्थान पर फिलहाल एक डॉक्टर कार्यरत है। लैब टेक्नीशियन का स्वीकृत पद भी खाली है। स्टाफ नर्सों के आठ रिक्त पदों के कारण सीमित स्टाफ पर बड़ी आबादी का भार है।
सीबीएमओ डॉ. नितिन सिंह तोमर ने बताया कि अटैच कर्मचारियों को वापस भेजने और रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए लगातार मांग पत्र भेजे जा रहे हैं। सोनोग्राफी सुविधा शुरू कराने के लिए भी विशेषज्ञ डॉक्टर की मांग विभाग से की गई है।
