सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग हादसे में 12 लोगों की मौत , बचाव अभियान जारी

गंगटोक, 21 जुलाई (वार्ता) सिक्किम में नामची जिले के समरदुंग-झोलुंगे क्षेत्र में एनएचपीसी तीस्ता चरण-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से कम से कम 12 लोगों की मौत हो गयी।

अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को सुरंग ढहने के बाद संदिग्ध मीथेन गैस का रिसाव हुआ, जिससे पूरी सुरंग में घना धुआँ और जहरीली गैस भर गयी। घटना के समय कई मजदूर अंदर फंस गये थे, जबकि दो मजदूर बाहर निकलने में सफल रहे। बचाव दल ने कल रात भारी मशक्कत के बाद 16 मजदूरों को जीवित बाहर निकाला और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। मंगलवार तड़के से अब तक 12 शव बरामद किये जा चुके हैं, जिनमें से आठ की पहचान हो गयी है।

नामची जिला पुलिस अधीक्षक सोनम डी. भूटिया ने कहा कि कई मजदूर अभी भी अंदर फंसे हुए हैं और मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। कोल इंडिया की विशेष बचाव टीम के एक सदस्य ने बताया कि आठ और लोगों के अंदर होने की संभावना है।

मृतकों की पहचान पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के बोलो उरांव, गोरा उरांव और बिकेसर उरांव; पंजाब के पठानकोट के यासोहल; उत्तराखंड के देहरादून के विक्की रावत; असम के बाबू बोरोदलाई; और नामची के कटंग निवासी लाकपा दोरजी तमांग के रूप में हुई है। तीन अज्ञात शवों को पहचान के लिए अस्पताल भेजा गया है। बाद में और शव मिलने से कुल संख्या 12 हो गयी।

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोले) और राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने दुर्घटनास्थल का दौरा किया और एनएचपीसी अधिकारियों के साथ समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को बताया कि यह हादसा सोमवार को दोपहर के भोजन के समय हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दो मजदूर बच निकले जबकि कई अंदर फंसे रह गये थे। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), सिक्किम पुलिस, अग्निशमन सेवा, जिला प्रशासन और एनएचपीसी के जवान संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रहे हैं। खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) की एक विशेष टीम भी सुरंग की स्थिति का जायजा लेने पहुंची है। हादसे के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चला है, हालांकि मीथेन गैस को इसका कारण माना जा रहा है।

श्री तमांग ने घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति के गठन का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाये जाने पर सख्त कार्रवाई की जायेगी।

सिक्किम सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजन को चार लाख रुपये और घायल मजदूरों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

श्री तमांग ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे फोन पर बात की है और राज्य को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “हमारी पहली प्राथमिकता बचाव कार्य पूरा कर फंसे हुए मजदूरों को बचाना है।”

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि रात में हुई भारी बारिश के कारण सुरंग में पानी भर गया था, जिससे काम में रुकावट आयी। आधी रात को पानी निकालने के बाद अभियान फिर शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि आसनसोल और दुर्गापुर से गैस विशेषज्ञ टीमें भी आ रही हैं।

बचाव दल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हादसा सुरंग के अंदर लगभग 1.5 किलोमीटर गहराई में हुआ। कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों की मौजूदगी से अभियान कठिन हो गया है और फंसे लोगों के बचने की उम्मीद कम हो रही है।

एनएचपीसी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि हादसा सोमवार दोपहर 1:04 बजे चट्टानों में फंसी संदिग्ध मीथेन गैस के अचानक फटने से हुआ, जिससे सुरंग में जहरीली गैस फैल गयी।

कंपनी ने कहा कि तुरंत आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू कर बचाव अभियान शुरू किया गया। शीर्ष प्रबंधन मौके पर पहुंच चुका है और हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जायेगी।

इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने श्री तमांग से फोन पर बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया है।

श्री अधिकारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि प्रभावित मजदूरों में से कई पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के हैं। उन्होंने दार्जिलिंग के जिलाधिकारी और मंत्री बिशल लामा को मौके पर भेजा है, जबकि पश्चिम बंगाल के गृह सचिव सिक्किम प्रशासन के संपर्क में हैं।

 

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