ट्रंप ईरान के ख़िलाफ़ कूटनीति एवं सैन्य कार्रवाई बढ़ाने पर कर रहे विचार, मध्यस्थों की शांति की अपील

वॉशिंगटन, 21 जुलाई (वार्ता) ईरान के साथ चल रहे टकराव में अमेरिकी और इजरायली अधिकारी दो संभावित रास्तों पर विचार कर रहे हैं या तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए थोड़े समय के लिए संघर्ष-विराम किया जाए या फिर तेहरान को समझौते के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से सैन्य कार्रवाई को और तेज किया जाए।

क्षेत्रीय एवं अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है लेकिन संभावना है कि वह आने वाले दिनों में कोई फ़ैसला लेंगे। इससे यह तय होगा कि अमेरिका और ईरान अपनी समस्याओं को कूटनीतिक तरीक़े से सुलझाएंगे या उनके बीच दुश्मनी और बढ़ेगी।

‘एक्सिओस’ के दो क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, क्षेत्रीय मध्यस्थों में कतर, मिस्र और पाकिस्तान ने दोनों देशों को 10 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव पेश किया है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अभी इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और उसने इज़रायल से ऐसे कदम न उठाने का आग्रह किया है जिनसे कूटनीतिक सफलता की राह में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

साथ ही, वॉशिंगटन बातचीत के नाकाम होने की संभावना के बाद की भी तैयारी कर रहा है; उसने इस इलाके में दर्जनों अतिरिक्त लड़ाकू विमान और हवा में ईंधन भरने वाले विमान तैनात किए हैं जबकि इज़रायली अधिकारियों का कहना है कि युद्ध के किसी भी संभावित विस्तार को देखते हुए आईडीएफ हाई अलर्ट पर है।

ईरान के ख़िलाफ़ लगातार 10 रातों तक हवाई हमले करने के बावजूद, अमेरिकी सेना इस इस्लामिक देश को होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण छोड़ने के लिए मजबूर करने में नाकाम रही है। इससे राष्ट्रपति ट्रंप बहुत गहरे युद्ध में फंसते जा रहे हैं जबकि उन्होंने बार-बार कहा था कि स्थिति उनके नियंत्रण में है।

लड़ाई का नया दौर शुरू होने के बाद से कम से कम तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। सोमवार को श्री ट्रंप ने मारे गए सैनिकों का बदला लेने का संकल्प लिया और पेंटागन को निर्देश दिया कि हर अमेरिकी की मौत के लिए ईरान को कई गुना ज़्यादा कीमत चुकाना चाहिए।

इस टकराव ने उर्जा बाजार को भी हिलाकर रख दिया है। ईरान द्वारा वाणिज्यिक नौवहन और खाड़ी क्षेत्र अवसंरचना पर हमले बढ़ाए जाने के बाद, सप्ताहांत के दौरान कच्चे तेल की कीमत कुछ समय के लिए 90 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई। इससे वैश्विक उर्जा आपुर्ति और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।

गंभीर हालात के बीच, क्षेत्रीय मध्यस्थ अब बदले की कार्रवाई को रोकने की कोशिश कर रहे हैं ताकि स्थिति और न बिगड़े हालांकि उनकी कोशिशें अबतक सफल नहीं हुई हैं।

प्रस्तावित 10-दिन के युद्धविराम के तहत, दोनों ओर से लड़ाई रुक जाएगी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले दोनों नौवहन मार्ग फिर से खुल जाएंगे और अमेरिका तथा ईरान उस समझौता ज्ञापन को बचाने के लिए बातचीत फिर से शुरू करेंगे जो वास्तव में खत्म हो चुका है।

वॉशिंगटन और तेहरान, दोनों में से किसी ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। दोनों पक्षों के अधिकारियों का मानना है कि किसी भी युद्धविराम पर सहमत होने से पहले, दोनों सरकारें लगातार सैन्य अभियानों के ज़रिए अपनी बातचीत की स्थिति को मज़बूत करने की कोशिश कर रही हैं।

इस बीच, यमन में ईरान समर्थित हूती आंदोलन ने सऊदी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है जिससे क्षेत्रीय संघर्ष में एक और मोर्चा खुल गया है और ऊर्जा अवसंरचना तथा नौवहन मार्गों पर दबाव बढ़ गया है।

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी चेतावनी दी है कि ईरान के किसी भी सीधे हमले का जवाब इजरायल बहुत ज़बरदस्त तरीके से देगा। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि यह टकराव खाड़ी क्षेत्र से आगे भी फैल सकता है।

क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, मध्यस्थता की यह ताज़ा कोशिश उन प्रस्तावों पर आधारित है जिन पर 11 जुलाई को मस्कट में ओमान, ईरान और कतर के बीच बातचीत हुई थी। इस बातचीत में अमेरिका ने ईरान से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए सार्वजनिक रूप से प्रतिबद्धता ज़ाहिर करने की मांग की थी।

वह बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई जिसके बाद ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमले फिर से शुरू कर दिए। इसके जवाब में अमेरिका ने बमबारी अभियान शुरू किया जो हर रात जारी है।

प्रस्तावित संरचना होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले दोनों नौवहन मार्गों को फिर से खोल देगा, ओमान के जलक्षेत्र से होकर जाने वाला दक्षिणी रास्ता, जिसमें ईरान का कोई दखल नहीं होगा और ईरान के जलक्षेत्र से होकर जाने वाला उत्तरी रास्ते में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी नहीं होगी।

समझौता विराम के दौरान, वॉशिंगटन और तेहरान जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री यातायात के लिए लंबे समय तक चलने वाली व्यवस्था पर बातचीत करेंगे। जिन विचारों पर चर्चा हुई है उनमें एक ऐसी व्यवस्था भी शामिल है जिसके तहत ईरान समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और संबंधित सेवाओं के लिए सीमित सेवा शुल्क ले सकेगा। एक और प्रस्ताव के तहत, ऐसे शुल्क को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन की भागीदारी वाले एक संयुक्त रूप से संचालित अंतरराष्ट्रीय कोष में जमा किया जाएगा।

मध्यस्थता में शामिल अधिकारियों में कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी, कतर के दूत अली अल-थावदी, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती और ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी शामिल हैं।

क्षेत्रीय सूत्रों का कहना है कि जॉर्डन में ईरानी मिसाइल हमले में कम से कम दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद युद्धविराम के प्रस्ताव पर चल रही बातचीत की रफ़्तार धीमी पड़ गई क्योंकि इसके बाद अमेरिका ने अपना रुख़ कड़ा कर लिया।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि बातचीत जारी है लेकिन उन्होंने इस बात पर बल दिया कि श्री ट्रंप फिलहाल सैन्य अभियान जारी रखना चाहते हैं।

अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का ध्यान इस बात पर है कि ईरान को एमओयू के उल्लंघन और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में लगातार हो रही आतंकवादी गतिविधियों की कीमत चुकानी पड़े।

इसके अलावा, राष्ट्रपति हाल ही में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए भी ईरान को जिम्मेदार ठहराएंगे और उससे इसकी कीमत वसूलेंगे। ये कड़े कदम तब तक जारी रहेंगे जब तक राष्ट्रपति कोई और फैसला नहीं लेते।”

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को पुष्टि की कि मध्यस्थ तनाव कम करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

श्री बघाई ने कहा कि मध्यस्थों के माध्यम से भेजे गए प्रस्ताव हमें मिल गए हैं लेकिन इस स्तर पर मैं उनके विवरण पर चर्चा नहीं करना चाहूंगा।

उन्होंने आगे कहा कि ईरान की सेनाएं मज़बूती से जवाब देना और अमेरिकी आक्रामकता की जड़ को कुचलना जारी रखेंगी।

यह अभी स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप आख़िरकार एक और अस्थायी युद्धविराम का समर्थन करेंगे या किसी बड़े समझौते के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे। एक क्षेत्रीय सूत्र ने बताया कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने से पहले व्हाइट हाउस कुछ और दिनों तक हमले जारी रख सकता है।

सूत्र ने कहा, “हम एक ऐसा समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं जो लंबे समय तक चल सके। ईरान अपनी शर्तें थोप नहीं सकता लेकिन उसे नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता।”

 

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