तेहरान, 20 जून (वार्ता) ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत और एक वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारी के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद इजरायल की आलोचना करते हुए उस पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि इजरायल को मिली “पूर्ण दंडमुक्ति” उसे अंतरराष्ट्रीय कानून, नैतिकता और न्याय की अनदेखी करने का अवसर दे रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्रीय शांति और मानवता के लिए उत्पन्न खतरे का सामना करने का आह्वान किया।
श्री बघाई ने कहा, “तर्क, कानून, नैतिकता और न्याय के खिलाफ़ अवज्ञा का यह शर्मनाक प्रदर्शन, (इजरायल के) आतंकवादी शासन को उसके समर्थकों से मिली पूरी छूट का एक और अपरिहार्य नतीजा है। यह शासन सभी सभ्य मानदंडों की पूरी तरह से अनदेखी करते हुए फिलिस्तीनी लोगों और पूरे क्षेत्र में नरसंहार का अपना अभियान जारी रखे हुए है।”
यह विवाद न्यूयॉर्क में संघर्ष के दौरान यौन हिंसा उन्मूलन अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र की बैठक में हुआ। बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव की बच्चों एवं सशस्त्र संघर्ष मामलों की प्रतिनिधि वैनेसा फ्रेजियर के बीच तीखी बहस हो गयी।
श्री डैनन ने संयुक्त राष्ट्र की उस रिपोर्ट पर आपत्ति जतायी, जिसमें पहली बार इजरायल को युद्ध के दौरान यौन हिंसा के आरोपों वाले देशों की सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने वाली संयुक्त राष्ट्र अधिकारी प्रमिला पैटन पर पक्षपात का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की।
बैठक के दौरान सुश्री फ्रेजियर ने हस्तक्षेप करते हुए व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचने का आग्रह किया और कहा कि रिपोर्ट सत्यापित साक्ष्यों पर आधारित है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। यह बहस जल्द ही बढ़ गयी। श्री डैनन ने जवाब में कहा, “फ्रेज़ियर को चुप रहना चाहिये।”
उन्होंने कहा, “हम एक सदस्य देश हैं, और आप संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करती हैं, इसलिए अब आपको चुप रहना होगा। आप चुप रहेंगी… आप और आपकी शर्मनाक रिपोर्ट।”
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि माहौल बहुत तनावपूर्ण था। दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात काटे जा रहे थे, जबकि बैठक के अधिकारी शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे।
यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब गाज़ा में जारी संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा एवं अन्य तरह के दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर इजरायल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच-पड़ताल बढ़ गयी है। मई में जारी एक संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा में शामिल होने के संदेह वाले देशों की सूची में इज़रायल को रूस के साथ रखा गया था। इज़रायली अधिकारियों ने इस कदम को पक्षपातपूर्ण बताते हुए सख्ती से खारिज कर दिया है।
माल्टा की संयुक्त राष्ट्र में पूर्व राजदूत सुश्री फ्रेज़ियर ने इस हफ़्ते एक अन्य रिपोर्ट जारी करके चेतावनी दी है कि बच्चों के अधिकारों के उल्लंघनों के लिए इज़रायली ‘सेटलर’ (फिलिस्तीनी बस्तियों में जबरन बसने वाले) समूहों को वैश्विक स्तर पर ब्लैकलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। यह रिपोर्ट श्री गुटेरेस की उन चिंताओं के बाद आई है, जिनमें उन्होंने फ़िलिस्तीनी बच्चों के ख़िलाफ़ उल्लंघनों में “बहुत ज़्यादा” बढ़ोतरी का ज़िक्र किया था।
इस टकराव के जवाब में, श्री बघाई ने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में एक बयान जारी किया। उन्होंने इस घटना को इलाके में इज़रायल की बेलगाम हरकतों के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं “पूरी तरह से बेखौफ होकर की गयी कार्रवाई” को दिखाती हैं। उन्होंने इजरायल को “शांति और इंसानियत के लिए गंभीर खतरा” बताते हुए उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की अपनी मांग को फिर से दोहराया।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के निष्कर्ष सत्यापित साक्ष्यों पर आधारित हैं और उनकी स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए, जबकि इजरायल इन आरोपों को खारिज करते हुए रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बता रहा है।
