नयी दिल्ली, वेंकटेश प्रसाद ने अपनी स्विंग और रणनीति से 90 के दशक में भारतीय तेज गेंदबाजी को नई पहचान दी। जानिए उनके टेनिस बॉल से लेकर टीम इंडिया तक के सफर की अनसुनी कहानी।
5 अगस्त 1969 को बेंगलुरु में जन्मे बापू कृष्णराव वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे समझदार और तकनीकी रूप से कुशल फास्ट-मीडियम गेंदबाजों में से एक माने जाते हैं। 1990 के दशक के बीच में इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने वाले, लंबे-कद-काठी के इस दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने भारत की गेंदबाजी लाइन-अप में बचाव और हमले, दोनों ही मोर्चों पर अहम भूमिका निभाई। सीम पोजीशन पर बेहतरीन कंट्रोल, खतरनाक और चकमा देने वाली स्लोअर बॉल और भारतीय पिचों से भी तेज उछाल निकालने की काबिलियत के लिए दुनिया भर में मशहूर प्रसाद ने अपनी तेज गति के बजाय अपनी रणनीतिक समझ का लोहा मनवाया।
अपने आंकड़ों और उपलब्धियों से कहीं आगे, उन्होंने कड़े मुकाबलों में दिखाए गए जबरदस्त जज्बे और यादगार पलों के जरिए भारतीय पॉप कल्चर में अपनी खास जगह बनाई। उन्होंने एक ऐसे ‘बिग-मैच प्लेयर’ के तौर पर अपनी पहचान बनाई जो भारी दबाव में भी शानदार प्रदर्शन करता था।
परिवार और शुरुआती जीवन
कर्नाटक के बैंगलोर में एक पारंपरिक मध्यम-वर्गीय कन्नड़ परिवार में जन्मे प्रसाद की परवरिश में खेल-कूद के बजाय पढ़ाई-लिखाई में अच्छे प्रदर्शन को ज्यादा अहमियत दी गई। उनके पिता जो औपचारिक शिक्षा में पक्का यकीन रखते थे, शुरू में क्रिकेट को कमाई का जरिया नहीं बल्कि मनोरंजन का एक साधन मानते थे। एक अनुशासित घर में पले-बढ़े प्रसाद को स्कूल के कड़े शेड्यूल और खेल के प्रति अपने बढ़ते जुनून के बीच तालमेल बिठाना पड़ता था। वो बैंगलोर की सड़कों पर टेनिस बॉल से प्रैक्टिस करते थे।
पारिवारिक माहौल ने उनमें एक शांत और समझदारी भरा स्वभाव विकसित किया, जिसने आगे चलकर मैदान पर उनकी पहचान बनाई। माता-पिता की शुरुआती हिचकिचाहट के बावजूद उनके जबरदस्त कुदरती हुनर ने आखिरकार उनका पूरा समर्थन हासिल कर लिया। लेकिन शर्त ये थी कि वो अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे और उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर इस वादे को निभाया।
मैट वाली पिचों से नेशनल टीम तक का सफर
भारतीय क्रिकेट के ऊंचे मुकाम तक पहुंचने का प्रसाद का सफर 1980 के दशक के आखिर में घरेलू क्रिकेट में कड़े मुकाबले और आधुनिक ट्रेनिंग सुविधाओं की कमी से भरा था। कर्नाटक के मजबूत क्लब क्रिकेट से निकलकर, उन्होंने रणजी ट्रॉफी में मैट और टर्फ वाली पिचों पर सालों तक कड़ी मेहनत की और स्थानीय खिलाड़ियों की एक शानदार पीढ़ी के साथ अपने हुनर को निखारा।
उनकी सबसे बड़ी चुनौती उस दौर की सोच से निपटना था। जिसमें लाइन-और-लेंथ स्विंग बॉलिंग के बजाय तेज रफ्तार गेंदबाजी को ज्यादा अहमियत दी जाती थी। खतरनाक लेग-कटर और बेहतरीन लेट आउटस्विंग गेंदबाजी में महारत हासिल करके उन्होंने नेशनल सिलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद 1994 में न्यूजीलैंड के खिलाफ उनका वनडे डेब्यू हुआ और फिर 1996 में लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू, जहां उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर अपनी काबिलियत साबित कर दी।
निजी जिंदगी और पत्नी का साथ
इंटरनेशनल क्रिकेट की चकाचौंध और शोर-शराबे से दूर वेंकटेश प्रसाद को अपनी पत्नी जयंती से भावनात्मक सहारा मिला। इस जोड़े ने 1996 में एक सादे समारोह में शादी की। ये साल उनके लिए बहुत अहम था क्योंकि इसी दौरान उन्हें दुनिया भर में खेल की दुनिया में बड़ी पहचान मिली थी। प्रसाद हमेशा मानते रहे हैं कि उनके मुश्किल खेल करियर के दौरान जयंती ही वो ताकत थीं जिन्होंने उन्हें संभाले रखा।
उन्होंने लोगों से मिलने वाले बहुत ज्यादा प्यार और चोट के कारण खेल से दूर रहने के मुश्किल दौर दोनों ही स्थितियों में प्रसाद का साथ दिया। मीडिया की नजर से दूर अपनी निजी जिंदगी को बनाए रखते हुए ये जोड़ा बेंगलुरु में बस गया, जहां उन्होंने अपने बेटे पृथ्वी की परवरिश की। उनकी दशकों पुरानी शादी ने उन्हें एक शांत और मजबूत आधार दिया जिसकी वजह से प्रसाद एक एक्टिव खिलाड़ी से कॉर्पोरेट और एडमिनिस्ट्रेटिव भूमिकाओं में आसानी से ढल पाए।

रिटायरमेंट के बाद मास्टरमाइंड कोच और बेबाक एक्सपर्ट
खेल से रिटायर होने के बाद, प्रसाद ने कामयाबी के साथ एलीट कोचिंग, स्ट्रैटेजी और स्पोर्ट्स मीडिया के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय टीम के बॉलिंग कोच के तौर पर शानदार काम किया और 2007 में हुए पहले ICC T20 वर्ल्ड कप में भारत की जीत के लिए अहम बॉलिंग स्ट्रैटेजी तैयार कीं। इसके बाद, उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, चेन्नई सुपर किंग्स और किंग्स XI पंजाब जैसी IPL टीमों के साथ अहम कोचिंग भूमिकाएं निभाईं और साथ ही BCCI की जूनियर नेशनल सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के तौर पर भी काम किया।
आज प्रसाद एक सम्मानित क्रिकेट एनालिस्ट के तौर पर काम करते हैं और ग्लोबल ब्रॉडकास्ट और डिजिटल प्लैटफॅार्म पर सटीक और बेबाक टैक्टिकल कमेंट्री देते हैं। इसके अलावा, वो बड़े स्पोर्ट्स मैनेजमेंट वेंचर्स में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव और एडवाइजरी भूमिकाओं में अपने कॉर्पोरेट अनुभव का इस्तेमाल करते हैं, जिससे वो मॉडर्न क्रिकेट के बदलते स्वरूप से गहराई से जुड़े रहते हैं।
