50 लाख की बाउंड्रीवॉल का फर्जी भुगतान

शाजापुर,  देते हैं भगवान को धोखा, इंसां को क्या छोड़ेंगे… नगर पालिका के ठेेकेदार मंदिर निर्माण में भी फर्जीवाड़ा और घोटाला करने से बाज नहीं आए. दुपाड़ा रोड स्थित चामुंडा माता मंदिर विकास को लेकर नगर पालिका द्वारा यहां पेबर ब्लॉक, रिटर्निंग वॉल और बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन ठेकेदार ने बिना निर्माण किए ही फर्जी बिल प्रस्तुत कर दिए. हैरत की बात तो यह है कि नगर पालिका के जिम्मेदारों ने बिना भौतिक सत्यापन के ही इस फर्जी बिल को पास कर दिया और ठेकेदार को करीब 50 लाख का भुगतान कर दिया. रिटर्निंग वॉल तो आधी बनी हुई है, लेकिन मंदिर के पीछे न तो कोई बाउंड्री है और न कोई वॉल है.

गौरतलब है कि दुपाड़ा रोड स्थित मां चामुंडा टेकरी पर मंदिर के पीछे पेबर ब्लॉक, रिटर्निंग वॉल की निविदा 2016 में जारी की गई थी. निविदा 15 लाख की थी, जो काम होते-होते 50 लाख तक पहुंच गई. ठेकेदार जायसवाल कंस्ट्रक्शन को 9.95 एबो एसओआर से टेंडर हुआ था. इस मामले में जब सूचना अधिकार के तहत नवभारत ने जानकारी ली, तो उसके अनुसार वर्ष 2016 में इस टेंडर की प्रक्रिया चालू हुई थी और मां चामुंडा टेकरी के पीछे पेबर ब्लॉक और बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया जाना था, लेकिन आज दिनांक तक न तो मौके पर पेबर ब्लॉक है और न ही बाउंड्रीवॉल. प्रकरण क्रमांक 388/2016/3/5 2020 को कुल 50 लाख 96 हजार 91 का बिल बना था, जिसका भुगतान 48 लाख 44 हजार किया गया. कोविड के समय 13 मई 2022 को 53 लाख का भुगतान 15वें वित्त आयोग के मद से करने के निर्देश दिए गए थे. अब सवाल यह उठता है कि 15 लाख की बाउंड्रीवॉल बढ़ते-बढ़ते 54 लाख तक पहुंच गई और बिना भौतिक सत्यापन के करीब 50 लाख का भुगतान भी कर दिया.

बिना सत्यापन के कैसे कर दिया भुगतान

नगर पालिका के इंजीनियर और ठेकेदार के गठबंधन के कारण बिना बाउंड्रीवॉल बने ही भुगतान हो गया, जबकि मौके पर भुगतान के पहले इंजीनियर को भौतिक सत्यापन करना होता है लेकिन नगर पालिका के इंजीनियर भ्रष्टाचार में इस कदर डूबे हैं कि उन्होंने बिना भौतिक सत्यापन किए ठेकेदार द्वारा बनाए गए बिलों को पास कर भुगतान कर दिया

 

मौके पर आज भी नहीं है बाउंड्रीवॉल…

 

जिस बाउंड्रीवॉल का कोविड के समय भुगतान किया गया है, वह बाउंड्रीवॉल आज भी चामुंडा माता टेकरी के पीछे कहीं भी नहीं बनी हुई है. याने कि बिना भौतिक सत्यापन किए इंजीनियर और ठेकेदार ने मिलकर मंदिर के नाम पर 50 लाख का चूना सरकार को लगा दिया. केवल एक तरफ रिटर्निंग वॉल बनी हुई है. उसके बाद पूरी जगह आज भी खाली है.

 

इनका कहना है

मामले की जानकारी लेकर ही बता पाएंगे. यदि मौके पर बाउंड्रीवॉल नहीं है, तो संबंधित इंजीनियर और ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही कराई जाएगी.

-भूपेंद्र कुमार दीक्षित, सीएमओ-शाजापुर

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