314 पदों के बदले कर दीं 496 नियुक्तियां,कमिश्रर, कलेक्टर से शिकायत

जबलपुर: स्वास्थ्य विभाग में ग्रुप-डी आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव आशीष मिश्रा ने क्षेत्रीय संचालक, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, जबलपुर संभाग, कलेक्टर को शिकायत सौंपकर डॉ. आदर्श विश्नोई पर भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं, नियमों की अनदेखी और आर्थिक लेनदेन के आरोप लगाए हैं। शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा चयन से वंचित योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता आशीष मिश्रा ने दावा किया है कि सूची में मनोज गुप्ता नामक ऐसे व्यक्ति को भी शामिल किया गया है जिनकी आयु 65 वर्ष से अधिक है। देखने वाली बात होगी कि कमिश्रर, कलेक्टर और शिक्षा विभाग में की गई इस शिकायत की किस तरह से जांच होती है और अगर वास्तव में भर्ती घोटाला हुआ है तो संबंधित डॉक्टर पर क्या गाज गिरती है। फिल्हाल अब जांच के गेंद जिम्मेदार अधिकारियों के पाले में आ चुकी है।

अधिकारियों को की गई शिकायत के अनुसार जबलपुर जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कार्य व्यवस्था सुचारू रखने के लिए उद्यमिता विकास केंद्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) के माध्यम से मल्टी स्किल्ड ग्रुप-डी वर्कर्स की भर्ती की जानी थी। जिला स्तरीय निविदा समिति द्वारा कुल 314 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसके लिए कलेक्टर से अनुमति भी प्राप्त थी। आरोप है कि निर्धारित संख्या के विपरीत जेयूएस इंटरप्राइजेज के माध्यम से 241 तथा ओम पारस मैनपावर सर्विस के माध्यम से 255 अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया। इस प्रकार कुल 496 लोगों को नियुक्ति देकर स्वीकृत संख्या से 182 अधिक भर्ती कर ली गई।

बिना चयन समिति अनुमोदन के सूची जारी करने का आरोप
समाजवादी पार्टी के आशीष मिश्रा ने नवभारत को बताया कि भर्ती के लिए गठित साक्षात्कार समिति में डॉ. आदर्श विश्नोई सहित अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया था, लेकिन अंतिम चयन सूची पर समिति के अन्य सदस्यों अजय कुरील और अरुण शाह के हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके बावजूद डॉ. विश्नोई ने 8 जून और 13 जून 2026 को नियुक्त अभ्यर्थियों की सूची विभिन्न बीएमओ को भेजकर ज्वाइनिंग प्रक्रिया शुरू करा दी थी।
किस आधार पर कर दीं गईं नियुक्तियां
शिकायत में कहा गया है कि सेडमैप के 3 जून 2026 के पत्र के अनुसार साक्षात्कार प्रक्रिया के माध्यम से केवल 57 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। ऐसे में शेष नियुक्तियां किस आधार पर की गईं, यह गंभीर जांच का विषय है। आरोप है कि कई ऐसे लोगों को भी नौकरी दे दी गई जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन तक नहीं किया था और न ही उन्हें इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर जारी हुआ था।
दो दिन में करा दिए 1000 इंटरव्यू
शिकायतकर्ता आशीष मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया है कि 24 और 25 मई 2026 को लगभग 1000 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू आयोजित किए गए थे। उनका कहना है कि मात्र दो दिनों में इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का निष्पक्ष साक्षात्कार कर पाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
डेढ़ करोड़ रुपये की वसूली का आरोप
शिकायत में डॉ. विश्नोई पर आउटसोर्स कंपनियों के साथ सांठगांठ कर प्रति अभ्यर्थी लगभग 40 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। दावा किया गया है कि करीब 400 नियुक्तियों के एवज में लगभग 1.5 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। हालांकि इन तमाम आरोपों की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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