
खोर। पहले ही किसान क्षेत्र में हो रही बारिश की कमी को लेकर मंदिरों में प्रार्थना करता फिर रहा है और ऊपर से नीलगायों के झुंड उगी हुई फसलों को अपने पैरों तले रौंद रहे है। जिससे किसान पूरी तरह हताश होने को मजबूर है। जावद के पास स्थित खोर क्षेत्र में नील गायों का आतंक अत्यधिक होने के कारण आने दिन वाहन चालक भी इनका शिकार होते जा रहे है। कई बार इनकी टक्कर से लोगो की जान भी जा चुकी है। लेकिन पास में जंगल होने के कारण इनको पकड़ पाना मुश्किल होता है। किसानों ने शासन से मांग की है कि या तो इन नील गायों के आतंक से छुटकारा पाने की किसानों को छूट दी जाए या शासन अपने स्तर पर इनको खेतो से दूर भेजने की कोई व्यवस्था करें। ताकि महंगाई के इस दौर में किसान बड़ी मुश्किल से बीज , खाद की व्यवस्था करता है। और रात में यह नीलगाय सब तहस नहस कर देती है। अगर शासन इनको हटाने की व्यवस्था नही कर सकती है तो इनसे होने वाले नुकसान का आंकलन कर उसकी भरपाई करना चाहिए। खोर , सरवानिया मसानी , नागदा , बोरखेड़ी तालाब , अचलावदा , दामोदरपुरा , कानका , हनुमंतिया के किसानों ने बताया कि विक्रम सीमेंट की माइंस एरिया इतना बड़ा है कि इसमें जरक जैसे जंगली जानवर आराम से रह सकते है जो रात्रि में गाँव के नजदीक कई बार देखे गए है जिससे भी ग्रामीण हमेशा दहशत में रहते है।
