विरोध के बीच कैसे सभी को साधेंगी भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष.

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

माना जाता है कि जब संगठन में नई नियुक्ति या नई जिम्मेदारी किसी को दी जाती है तो उसके पहले उस नाम पर सर्वसम्मति बनती है और फिर उसके नाम की घोषणा होती है जिससे संगठन से जुड़े लोग नवीन नियुक्ति को लेकर संबंधित को बधाईयां दे सकें और एकजुटता के साथ संगठन के हितों में काम करते रहें। मगर जबलपुर में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष की नियुक्ति ने जो संगठन में आपसी प्रतिद्वंदता दिखी, उसने संगठन के अनुशासन पर प्रश्र चिह्न खड़ा कर दिया। जानकारी के अनुसार जैसे ही भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा जबलपुर महानगर की नई नगर अध्यक्ष के रूप में आत्मिका सिंह की नियुक्ति हुई ठीक वैसे ही संगठन के भीतर असंतोष और चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

महिला मोर्चा की कई वरिष्ठ एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं ने इस नियुक्ति पर सवाल खड़े करते हुए ये तक कहा कि जिनकी नियुक्ति हुई है वो आखिर हैं कौन.. मतलब साफ था कि नवीन अध्यक्ष की जमीनी तौर पर किसी भी प्रकार की कोई सक्रियता नहीं थी जिसको लेकर महिला मोर्चा से जुड़ी कई दावेदारों और कार्यकर्ताओं ने अंदरूनी तौर पर विरोध दर्ज कराया। आत्मिका सिंह की नियुक्ति के बाद संगठन में सालों से कार्य कर रहीं कर्मठ महिलाओं के खेमे में निराशा बिल्कुल स्पष्ट रूप से देखी गई। कानाफूसी पर गौर करें तो सवाल खड़े किये जा रहे हैं कि यह नियुक्ति संगठन में नई ऊर्जा का संचार करेगी या फिर आने वाले कुछ दिनों में इस नियुक्ति के प्रति हल्ला बोल प्रदर्शन शुरू होगा..? उधर भाजपा ने अभी इस मामले में चुप्पी साधी हुई है।

चर्चाएं ये भी हैं कि महिला प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने अपनी पसंद से जबलपुर जिले की अध्यक्ष की नियुक्ति करवाई है। जानकारों की माने तो जबलपुर जिले के भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष के लिए कई कर्मठ महिलाओं ने उम्मीद जताई थी कि उन्हें इस पद की जिम्मेदारी संगठन में मिलेगी लेकिन अचानक से चौंकाने वाले नाम ने सभी के होश उड़ा दिए। क्योंकि किसी को उम्मीद नहीं थी कि नया नाम अध्यक्ष पद पर सुसज्जित होगा। ऐसे में जबलपुर भाजपा महिला मोर्चा की नई अध्यक्ष आत्मिका सिंह के लिए अन्य महिलाओं व कार्यकर्ताओं को साधना, एक बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल जो आसार नजर आ रहे हैं उससे तो साफ है कि उनकी नियुक्ति के बाद से संगठन में काफी लोग अंसतुष्ट हैं। जिनका नाम अध्यक्ष पक्ष पर नहीं चयनित हुआ वो तो ये भी कहते हुईं नजर आईं कि मेहनत हमारी, पद किसी और को, ये ठीक नहीं हुआ..।

मुख्यालय बुलाने के फरमान ने उड़ाई नींद

अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कैलाश जाटव की जबलपुर में पुलिस, नगर निगम व कलेक्ट्रेट विभाग के अफसरों की बैठक में जो हुआ उसकी चर्चा भोपाल में होती रही। इस बीच जबलपुर पुलिस के ऐसे कई टीआई अपने आप को बचाने के रास्ते ढूंढते भी नजर आए। खबर है कि जिनके खिलाफ फरमान जारी हुआ उनकी अभी भी नींद उड़ी हुई है। दरअसल अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कैलाश जाटव की समीक्षा बैठक सेे जिले के थाना प्रभारी गायब रहे, जिसके बाद अध्यक्ष ने सार्वजनिक फरमान जारी किया और लापरवाह थाना प्रभारियों को आड़े हाथों लेते हुए कह दिया कि जितने भी गायब टीआई हैं वे भोपाल मुख्यालय आकर जवाब पेश करें। इस आदेश के बाद किसी न किसी कारणों से बैठक में उपस्थित नहीं रहने वाले थाना प्रभारियों के खेमे में हड़कंप मचा और वे इधर उधर अपने बचाव के रास्ते खोजते नजर आए।

खबर ये भी है कि पुलिस अफसरों को बचाने के लिए जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बचाव के लिये ये रास्ता बताया है कि टीआई मेडिकल सर्टिफिकेट लेकर भोपाल जाएं और अपना जवाब पेश करें। इस पेशकश के बाद ये देखना होगा कि क्या ये बचाव का तरीका उन्हें आसानी से बचा पाएगा या फिर एक्शन की जद में अनुपस्थित सारे टीआई आ जाएंगे। क्योंकि जिस हिसाब से अध्यक्ष ने सख्ती दिखाई है उससे तो लग रहा है कि बैठक से अनुपस्थित रहने वाले थाना प्रभारियों पर गाज गिरना तय है। उधर अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कैलाश जाटव के सख्त रूख की चर्चाएं शहर में तेज हैं। जानकारों का तो कहना है कि पदाधिकारी हो तो ऐसा ही हो नहीं तो न हो। विदित हो कि अध्यक्ष ने बैठक में मौजूद सभी पुलिस अफसरों को निर्देश दिए थे कि जिन क्षेत्रों में अपराध और नशे की प्रवृत्ति हावी है वहां पूरी तरह से अंकुश लगाया जाए। इसके अलावा भी उन्होंने पुलिस को कई अहम निर्देश दिए थे।

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