जब डूबते रहे आशीष विद्यार्थी, कैमरे चलते रहे…लोग समझते रहे शूटिंग का हिस्सा, पुलिसकर्मी बने फरिश्ता

दिग्गज अभिनेता आशीष विद्यार्थी के जन्मदिन के मौके पर जानिए उनकी जिंदगी के वो अनसुने किस्से, जब फिल्म की शूटिंग के दौरान वे सचमुच डूबते-डूबते बचे और लोगों ने एक सीन समझा।

बड़ा पर्दा हो या छोटा पर्दा…अपनी खूंखार अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खौफ पैदा करने वाले आशीष विद्यार्थी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। सिनेमा में अपनी दमदार आवाज और बेहतरीन एक्टिंग के दम पर उन्होंने बॉलीवुड में एक अमिट छाप छोड़ी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्मों में 180 से अधिक बार मौत का सामना करने वाला यह खलनायक रियल लाइफ में भी एक बार मौत के मुंह से बाल-बाल बचकर वापस आया था।

यह खौफनाक किस्सा अक्टूबर 2014 का है जब छत्तीसगढ़ के दुर्ग में फिल्म ‘बॉलीवुड डायरी’ की शूटिंग चल रही थी। जहां महमरा एनीकट पर एक सीन की शूटिंग के दौरान आशीष विद्यार्थी को पानी में उतरना था। शॉट के दौरान वे उम्मीद से कहीं ज्यादा गहरे पानी में चले गए और तेज बहाव के कारण डूबने लगे। वहां मौजूद क्रू मेंबर्स और आम लोग किनारे खड़े होकर तालियां बजा रहे थे क्योंकि सबको लगा कि यह उनकी बेहतरीन अदाकारी का हिस्सा है। जब आशीष विद्यार्थी पूरी तरह डूबने लगे एक पुलिसकर्मी विकास सिंह ने पानी में छलांग लगाकर इस उनकी जान बचाई।

राष्ट्रीय पुरूस्कार का वो ऐतिहासिक मगर घबराहट वाली जश्न
आशीष विद्यार्थी ने अपने करियर की शुरुआत में ही गोविंद निहलानी की फिल्म ‘द्रोहकाल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक एक्टर का नेशनल अवॉर्ड जीता था। इस बड़ी कामयाबी के बाद डायरेक्टर निहलानी ने उन्हें एक शानदार पार्टी देने को कहा। उस दौर में आशीष फाइनेंशियल प्रोब्लम से गुजर रहे थे और उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे।

उन्होंने मुंबई के एक चीनी रेस्तरां में बेहद संकोच के साथ सिर्फ 3 सीटें बुक की थीं। लेकिन जब पार्टी शुरू हुई और वहां मेहमानों की भीड़ जुटने लगी तो आशीष की चिंता इतनी बढ़ गई कि वे एक कोने में सिर पकड़कर बैठ गए। बाद में डायरेक्टर ने हंसते हुए सारा बिल खुद चुकाया और आशीष की चिंता को दूर कर दिया।

फ्रीडम फाइटर से जुड़ा है इनके परिवार का अनोखा सरनेम
अभिनेता आशीष के घर में बचपन से ही कला का माहौल था क्योंकि उनकी मां रेबा एक फेमस कत्थक डांसर थीं और पिता गोविंद विद्यार्थी थियेटर के जाने-माने कलाकार थे। उनके पिता का असली सरनेम विद्यार्थी नहीं था।

दरअसल गोविंद जी अपने युवा दिनों में स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी का रोल निभाया करते थे। उस महान व्यक्तित्व से वे इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने हमेशा के लिए अपने नाम के आगे विद्यार्थी सरनेम जोड़ लिया। आशीष ने भी अपने पिता की इसी विरासत को आगे बढ़ाया और आज यह नाम भारतीय सिनेमा में सम्मान के साथ लिया जाता है।

थिएटर की दुनिया से शुरू हुई एक्टिंग की जर्नी
अभिनेता आशीष विद्यार्थी का अपनी मां और बेटे अर्थ के साथ बेहद गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने बंगाली सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री शकुंतला बरुआ की बेटी राजोशी से विवाह किया था जो खुद भी छोटे पर्दे का एक जाना-माना चेहरा रही हैं।

आशीष ने फिल्मों में विलेन के किरदारों को एक नई परिभाषा दी लेकिन उनका पहला प्यार हमेशा थिएटर ही रहा। उनका एकल नाटक ‘दयाशंकर की डायरी’ थियेटर के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है जिसमें उन्होंने बिना रुके सबसे लंबा मोनोलॉग यानी एकल संवाद बोलकर एक नया कीर्तिमान बनाया था।

जब फिल्म में निभाया फाइटर का रोल
आशीष विद्यार्थी बॉलीवुड की एक जानी-मानी हस्ती हैं, उन्होंने 11 अलग-अलग भाषाओं में बनी 300 से अधिक फिल्मों में काम किया हैं। जिसमें अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने वाली फिल्म ‘वेदा’ शामिल है। इस फिल्म में आशीष विद्यार्थी ने अभिनेता जॉन अब्राहम के साथ काम किया था, जो लोगों को काफी पसंद आया था। इसके अलावा ऋतिक रोशन की डेब्यू फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ में अपनी बेहतरीन एक्टिंग से जान डाल दी थी।

इसी के साथ फिल्म ‘तेजस’ में आशीष विद्यार्थी एक सीनियर ऑफिसर का रोल निभाया था। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ काम किया था। जो एयर फोर्स पायलट तेजस गिल के मिशनों में मेंटर का रोल अदा करते हैं। उनके गंभीर और प्रभावशाली एक्टिंग ने कहानी को मजबूती दी है, जिससे हर मिशन और भी रोमांचक बन गया।

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