
नई दिल्ली। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 जारी कर दी गई है। इस वैश्विक रैंकिंग में दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन शिक्षा की गुणवत्ता, शोध क्षमता, अंतरराष्ट्रीय पहचान, रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता और स्थिरता जैसे कई मानकों के आधार पर किया गया है।
रैंकिंग में भारतीय संस्थानों का दबदबा इस बार भी आईआईटी संस्थानों का रहा। हालांकि दुनिया की टॉप-100 यूनिवर्सिटीज की सूची में इस वर्ष भी कोई भारतीय संस्थान जगह नहीं बना सका। भारत की ओर से सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला संस्थान आईआईटी दिल्ली रहा, जिसने अपनी पिछली रैंकिंग में सुधार करते हुए 123वें स्थान से छलांग लगाकर 118वीं रैंक हासिल की है। इसके साथ ही आईआईटी दिल्ली देश का नंबर-1 उच्च शिक्षण संस्थान बन गया है।
आईआईटी बॉम्बे भारत में दूसरे स्थान पर रहा। वहीं आईआईटी मद्रास ने भी अपनी स्थिति मजबूत करते हुए वैश्विक स्तर पर 170वीं रैंक हासिल की है। पिछले साल यह संस्थान 180वें स्थान पर था। आईआईटी मद्रास भारत का तीसरा ऐसा संस्थान है जिसने दुनिया के शीर्ष 200 संस्थानों में जगह बनाई है।
देश के शीर्ष 10 संस्थानों में आईआईटी खड़गपुर को 205वीं, आईआईटी कानपुर और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु को संयुक्त रूप से 221वीं, दिल्ली विश्वविद्यालय को 322वीं, आईआईटी रुड़की को 335वीं और आईआईटी गुवाहाटी को 349वीं रैंक मिली है। इनमें भारतीय विज्ञान संस्थान और आईआईटी गुवाहाटी की रैंकिंग में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका का मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) लगातार 15वीं बार दुनिया का शीर्ष विश्वविद्यालय बना है। टॉप-10 वैश्विक विश्वविद्यालयों की सूची में अमेरिका और ब्रिटेन के चार-चार संस्थानों ने स्थान हासिल किया है, जबकि स्विट्जरलैंड और सिंगापुर के एक-एक संस्थान इसमें शामिल हैं।
क्यूएस रैंकिंग में विश्वविद्यालयों को अकादमिक प्रतिष्ठा, नियोक्ताओं के बीच छवि, शिक्षक-छात्र अनुपात, शोध प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और रोजगार परिणामों जैसे मानकों पर परखा जाता है।
आईआईटी दिल्ली के रैंकिंग सेल के प्रमुख प्रो. सोमनाथ वैद्य रॉय ने संस्थान की बेहतर रैंकिंग को लेकर सोशल मीडिया पर कहा कि नए पाठ्यक्रमों, आधुनिक बुनियादी ढांचे और वैश्विक स्तर पर बढ़ती भागीदारी के कारण आने वाले वर्षों में संस्थान की अंतरराष्ट्रीय स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।
