मानसून की बेरुखी: मृग नक्षत्र में बोवनी के आसार कम, किसानों की बढ़ी चिंता

बैतूल। मानसून की देरी के कारण मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में खरीफ फसलों की बोवनी अब तक शुरू नहीं हो सकी है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है और मृग नक्षत्र में बुआई की संभावना भी क्षीण होती नजर आ रही है।

कृषि विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार जिले में 7 जून से प्रारंभ हुआ मृग नक्षत्र 21 जून तक रहेगा, लेकिन अब तक मानसून की सक्रिय आमद नहीं हुई है। कुछ क्षेत्रों में प्री-मानसून वर्षा दर्ज की गई है, किंतु वह बोवनी के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन, मक्का, मूंगफली और अरहर जैसी खरीफ फसलों की सुरक्षित बोवनी के लिए खेतों में कम से कम चार इंच गहराई तक नमी आवश्यक होती है। वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में यह स्थिति नहीं बन पाई है।

भारतीय कृषि परंपरा में मृग नक्षत्र को खरीफ फसलों की बोवनी के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इसी कारण किसानों ने पहले से खेतों की जुताई, बीज और उर्वरकों की व्यवस्था कर रखी है। हालांकि अपेक्षित वर्षा नहीं होने से वे बुआई शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार नौतपा के दौरान एक जून को जिले के कई क्षेत्रों में अच्छी प्री-मानसून वर्षा हुई थी, जिसके बाद किसानों ने खेतों की तैयारी तेज कर दी थी। लेकिन इसके बाद वर्षा का क्रम नहीं बना और तापमान में वृद्धि होने से खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रह सकी।

कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून सक्रिय भी हो जाता है, तब भी मृग नक्षत्र की शेष अवधि में बड़े पैमाने पर बोवनी कर पाना कठिन होगा। ऐसी स्थिति में अधिकांश किसानों को 22 जून से प्रारंभ होने वाले अड़धड़ा नक्षत्र में खरीफ फसलों की बुआई करनी पड़ सकती है।

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