
सिंगरौली । म.प्र. उच्च न्यायालय की जबलपुर खंडपीठ ने शासकीय राजनारायण स्मृति महाविद्यालय बैढ़न जिला सिंगरौली के प्राध्यापक डॉ. एमयू सिद्दीकी द्वारा दायर स्थानांतरण संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है।
यह आदेश 15 जून 2026 को न्यायमूर्ति विशाल धगत ने पारित किया। याचिका में 4 अक्टूबर 2023 को जारी स्थानांतरण आदेश तथा 30 अप्रैल 2026 को प्रतिनिधित्व निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने पैरवी की, जबकि राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी उपस्थित हुए। डॉ. सिद्दीकी को शासकीय राजनारायण स्मृति महाविद्यालय बैढ़न जिला सिंगरौली से शासकीय महाविद्यालय बहोरीबंद, जिला कटनी स्थानांतरित किया गया था। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने पूर्व में भी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद उनके प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे। इधर बता दें कि चार वर्ष पूर्व स्थानांतरण हुआ था, उसमें बहानेबाजी की थी। फिर से न्यायालय के समक्ष बहानेबाजी की दलील दी है।
न्यायालय के समक्ष भी रखी बहानेबाजी
याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि वह प्राध्यापक संघ के संभागीय अध्यक्ष रहे हैं, उनके वृद्ध माता-पिता हैं तथा उनके निर्देशन में कई शोधार्थी शोध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी है और उनके स्थानांतरण से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। वहीं राज्य शासन ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को पूर्व में न्यायालय से संरक्षण मिलने के कारण चार वर्ष से अधिक समय तक बैढ़न में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ और अब उनका स्थानांतरण पूर्णत: प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर किया गया है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है तथा स्थानांतरण नीति के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं पाया गया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानांतरण एक प्रशासनिक विषय है और जब तक किसी वैधानिक प्रावधान, मौलिक अधिकार या गंभीर प्रतिकूल नागरिक परिणाम का प्रश्न न हो, तब तक न्यायालय ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता। इसी आधार पर याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया।
अधिवक्ता पर लगा 10 हजार रूपये का अर्थदंड
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। आदेश में उल्लेख किया गया कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने राज्य सरकार के विरुद्ध असंसदीय एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। न्यायालय ने कहा कि किसी भी अधिवक्ता द्वारा राज्य की संस्थाओं के खिलाफ ऐसी भाषा का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। न्यायालय ने इसे अनुचित आचरण मानते हुए अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। यह राशि 30 दिनों के भीतर म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के सचिव के समक्ष जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रकार न्यायालय ने न केवल स्थानांतरण आदेश को वैध माना, बल्कि न्यायालयीन मर्यादा बनाए रखने का भी स्पष्ट संदेश दिया। इधर चर्चा है कि डबल बैच में जाने की तैयारी हो रही है।
