नयी दिल्ली, 17 जून (वार्ता) दिल्ली पुलिस के साइबर थाने ने नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ कर दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार ने कहा कि आरोपी एक संगठित साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट का हिस्सा थे और वे खुद को भर्ती सलाहकार और जानी-मानी विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधि के रूप में पेश करके देश भर में पीड़ितों को निशाना बनाते थे। उन्होंने बताया कि नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने और अतिरिक्त पीड़ितों का पता लगाने के प्रयास चल रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई एक महिला की दर्ज शिकायत के बाद की गई है। इसमें आरोप था कि जापान में नौकरी दिलाने के वादे पर उससे 1.63 लाख रुपये जमा कराये गये। जालसाजों ने कथित तौर पर दस्तावेजों को तैयार करने, सत्यापन और वीजा प्रसंस्करण शुल्क सहित दूसरे बहानों के तहत पैसे एकत्र किए थे।
जांच के दौरान, पुलिस ने पैसों के लेन-देन का पता लगाया और उन लाभार्थी बैंक खातों की पहचान की जिनका उपयोग कथित तौर पर ठगी गयी राशि को प्राप्त करने और वितरित करने के लिए किया गया था।
पुलिस की एक टीम ने उत्तर प्रदेश के बरेली में जांच की और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान कुश भटनागर और अमित के रूप में हुई है। पुलिस ने कहा कि सिंडिकेट ने कथित तौर पर ऑनलाइन मंचों से नौकरी चाहने वालों का डेटा प्राप्त किया और प्रतिष्ठित जापानी कंपनियों के नाम पर फर्जी ईमेल भेजे, जिसमें पीड़ितों को सूचित किया गया कि उन्हें विदेशी रोजगार के लिए चुना गया है। फर्जी साक्षात्कार आयोजित किए गए और पीड़ितों को कथित तौर पर विभिन्न स्वीकृतियों और प्रसंस्करण औपचारिकताओं के लिए भुगतान करने के लिए राजी किया गया।
इस कार्रवाई के दौरान कथित धोखाधड़ी से जुड़े मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए। पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे भर्ती एजेंसियों और नियोक्ताओं की प्रामाणिकता को सत्यापित करें और उचित सत्यापन के बिना नौकरी के प्रस्तावों या संबंधित प्रक्रियाओं के लिए भुगतान करने से बचें।

