भोपाल: कैंसर मरीजों के इलाज पर दवाओं के संकट की मार पड़ रही है। कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन दवाओं की कमी से भोपाल समेत देश के कई शहरों में मरीज परेशान हैं। भोपाल एम्स में भी कुछ मरीजों की कीमोथेरेपी की तारीख आगे बढ़ानी पड़ रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस कमी की मुख्य वजह दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्लैटिनम की बढ़ती कीमत, आयात में आ रही दिक्कतें और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी है। पिछले एक साल में प्लैटिनम की कीमत में काफी इजाफा हुआ है, जिससे दवा कंपनियों की लागत बढ़ गई है।
हालांकि राहत की बात यह है कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने इन दवाओं की अधिकतम कीमतों में बढ़ोतरी की मंजूरी दी है। इससे आने वाले समय में दवाओं की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक मरीजों को इलाज में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
