नई दिल्ली | देश में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर गंभीर चिंता जताते हुए गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने गृह मंत्रालय और NCRB के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1,87,702 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.9 प्रतिशत अधिक है। समिति ने अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है।
प्रमुख राज्यों में असुरक्षा का ग्राफ
डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सर्वाधिक मामले दर्ज हुए हैं, जबकि दिल्ली अपराध दर के मामले में शीर्ष पर है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 3.45 लाख से अधिक मामले अभी भी अदालती ट्रायल के लिए लंबित हैं, जो न्याय प्रक्रिया में देरी और पीड़ित बच्चों को त्वरित न्याय न मिल पाने की एक बड़ी चुनौती को दर्शाता है।
डिजिटल सुरक्षा और रोकथाम पर फोकस
संसदीय समिति अब महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और आईटी मंत्रालय के साथ मिलकर इन अपराधों के मल्टी-डाइमेंशनल पहलुओं पर चर्चा करेगी। चर्चा का मुख्य केंद्र बच्चों का साइबर शोषण, ऑनलाइन ग्रूमिंग और तकनीक आधारित अपराधों को रोकना है। समिति ने जोर दिया है कि न केवल कानून को मजबूत करने, बल्कि मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और पीड़ितों के लिए संस्थागत सहायता प्रणाली विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है।

