इंदौर: देश में दूसरी रैंक बनाने वाले इंदौर के उत्कर्ष अवधिया ने बताया कि मैंने रैंक को ध्यान में रखकर पढ़ाई नहीं की. केवल पढ़ाई पर फोकस किया. तैयारी के हिसाब टॉप 100 में आने की उम्मीद थी लेकिन सोचा नहीं था दूसरी रेंक आ जाएगी. इस रैंक को पाकर में खुश हूं. मेरे दादाजी का सपना था कि पापा डॉक्टर बने लेकिन वे बन नहीं पाए. फिर पापा का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं. बस फिर मन में ठानकर तैयारी शुरू कर दी.
आज दादा और पापा दोनों का सपना पूरा हुआ. मम्मी-पापा की आंख में खुशी के आंसू देख मुझे मेरी मेहनत का फल मिल गया. उत्कर्ष ने बताया कि मैं 11वीं के बाद से ही तैयारी शुरू कर दी थी. इंदौर में घर होने के बावजूद मैंने होस्टल में रहकर पढ़ाई की क्योंकि घर पर पढ़ाई का माहौल बन नहीं पाता है. होस्टल में दोस्तों का साथ मिला जाता है और एक दूसरे की मदद कर देते हैं. मैं रात को जल्दी सो जाता था और सुबह उठकर सेल्फ स्टडी करता था.
इसके बाद कोचिंग जाता था और फिर शाम को वहां से आकर सेल्फ स्टडी करता था. मूड फ्रेश करने के लिए कुछ देर स्पोर्ट्स भी खेलता था. मेरा मानना है पढ़ाई के साथ हेल्थ और अपने शौक पर भी थोड़ा ध्यान देने जरूरी है. मुझे वॉलीबाल, बेडमिंटन और चेस खेलना पसंद है. पढ़ाई का मैंने कभी तनाव नहीं लिया बस फोकस्ड रहा. सोशल मीडिया से भी दूरी बनाए रखी. भविष्य के लिए मैंने अभी कुछ सोचा नहीं है.
बस पढ़ाई पर फोकस करूंगा. इस दौरान जो अच्छा लगेगा मैं उसमें आगे बढ़ंगा. मैं दूसरे स्टूडेंट्स को भी यही संदेश देना चाहूंगा कि पढ़ाई का तनाव न लें. फोकस्ड होकर समय प्रबंधन के साथ पढ़ाई करें. सोशल मीडिया पर समय खराब करने के बजाय कुछ प्रोडक्टिव करें. उत्कर्ष के पिता आलोक अवधिया निजी बैंक में मैंनेजर है. उन्होंने कहा कि पढ़ाई के लिए हमने कभी प्रेशर नहीं किया. उसे उसकी क्षमता के अनुसार पढ़ने को कहा. उसे हमने अच्छा माहौल दिया. सभी पैरेंट्स से भी यहूं कहूंगा कि अपने बच्चों की क्षमता को पहचाने. उन पर किसी चीज के लिए प्रेशर ने बनाएं
