
जबलपुर। गोरखपुर के रामपुर स्थित आवासीय पट्टे की भूमि पर कमर्शिलय काम्पलैक्स का निर्माण किये जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दायर मामले में आरोप है कि पट्टा निरस्त होने के बाद अनावेदक ने कब्जा कर भूमि विस्तार करते हुए आर्थिक लाभ उठाने अवैध कमर्शियल निर्माण किया है। इतना ही नहीं मामले में सरकारी रिकार्ड गायब होने का भी आरोप है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् अनावेदक को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। साथ ही शासकीय अधिवक्ता को इंस्ट्रक्शन लेकर पक्ष रखने के निर्देश दिये है।
यह जनहित का मामला जबलपुर के रामपुर निवासी गनेश धनगढ़ की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने पक्ष रखा। आवेदक की ओर से कहा गया कि रामपुर स्थित जमीन का पूर्व में अनावेदक मोह. मुशरक अली को आवास के लिये छह सौ वर्ग फिट जमीन का पट्टा आवंटित हुआ था। जिसका आवेदक ने व्यवसायिक उपयोग करते हुए चार दुकानों का निर्माण कर दिया। जिसकी शिकायत पर वर्ष 2001 में पट्टा निरस्त कर दिया गया था। जिसके बाद अनावेदक ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। न्यायालय ने सुनवाई का अवसर देते हुए गुण-दोषों के आधार पर मामले का निराकरण करने के निर्देश दिये थे। आरोप है कि इसके बावजूद अनावेदक ने उक्त प्लाट के आसपास की भूमि पर कब्जा करते हुए करीब सैकड़ो वर्ग फिट जमीन कब्जा ली और उस पर पूरा कमर्शियल काम्पलैक्स का निर्माण कर दुकानों को किराये पर दे दिया। जिसकी शिकायत होने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, इतना ही नहीं आरटीआई के तहत सरकारी रिकार्ड चाहा गया तो रिकार्ड उपलब्ध न होने की जानकारी दी गई, जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई है। मामले में सचिव राजस्व विभाग, कलेक्टर जबलपुर, तहसीलदार व अनावेदक मोह. मुशरक अली को पक्षकार बनाया गया है।
