इंदौर: केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने सोमवार को इंदौर के गोम्मटगिरी स्थित सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान में महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ समेत केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का आकलन किया.
बैठक में महिला सशक्तिकरण और बाल विकास से जुड़ी नई पहलों पर भी चर्चा हुई. मंत्री ने कहा कि इंदौर स्थित यह संस्थान मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है. यहां महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तीन प्रमुख मिशनों-मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य-से जुड़े हितधारकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है.
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि संस्थान केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध और मूल्यांकन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. विभिन्न योजनाओं के प्रभावों का अध्ययन कर उनके बेहतर क्रियान्वयन के लिए सुझाव तैयार किए जाते हैं. वर्तमान में महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से आए प्रशिक्षणार्थी यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. बैठक में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, इंदौर सांसद शंकर लालवानी तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पोषण पर ध्यान देना आवश्यक
केंद्रीय मंत्री ने बच्चों के प्रारंभिक विकास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार छह वर्ष की आयु तक बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास हो जाता है. ऐसे में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य तथा प्रारंभिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है. उन्होंने बताया कि सरकार पोषण माह और पोषण पखवाड़ा जैसे अभियानों के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने का प्रयास कर रही है, ताकि कुपोषण से मुकाबला करने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सके.
