
उज्जैन, अधिक मास की अंतिम सोमवती अमावस्या पर उज्जैन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। एक ही दिन में करीब 5 लाख श्रद्धालुओं, पर्यटकों और धर्मप्रेमियों के आगमन से शहर सिंहस्थ के रंग में रंगा नजर आया।
रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट और सोमकुंड सहित सभी घाटों पर सुबह से देर शाम तक स्नानार्थियों की भीड़ रही। महाकाल मंदिर समेत प्रमुख देवालयों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगीं। अधिक मास के समापन और सोमवती अमावस्या के दुर्लभ संयोग ने श्रद्धालुओं की आस्था को और प्रबल कर दिया।
शहर में कई जगह जाम की स्थिति बनी। सड़कों पर ऑटो, ई-रिक्शा, दोपहिया वाहन, निर्माण कार्य के ट्रैक्टर-डंपर और पैदल यात्री एक साथ दिखाई दिए। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने धैर्य व सहयोग का परिचय दिया।
प्रशासन ने इस आयोजन को सिंहस्थ-2028 की पूर्व रिहर्सल के रूप में लिया। यातायात, पार्किंग, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक परीक्षण किया गया। जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, होमगार्ड, एसडीआरएफ और मंदिर प्रशासन की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाला।
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने नवभारत से चर्चा में कहा कि हर बड़ा आयोजन सिंहस्थ की तैयारियों को परखने का अवसर है। आने वाले समय में 50 करोड़ श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए हर आयोजन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण अभ्यास है।
होमगार्ड और एसडीआरएफ की सतर्कता से कई हादसे टले। रामघाट पर गहरे पानी में गई महिला श्रद्धालु को जवानों ने बचाया। भीड़ में बिछड़े बालक को परिजनों से मिलवाया गया, जबकि एक अन्य श्रद्धालु को डूबने से बचाया गया।
लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से होटल, धर्मशाला, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन और पूजन सामग्री विक्रेताओं के कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। हालांकि निर्माण कार्यों और भारी यातायात से कुछ स्थानों पर परेशानी भी हुई। प्रशासन अब इन अनुभवों का विश्लेषण कर आगामी आयोजनों के लिए रणनीति तैयार करेगा।
