इंदौर: सोमवार सुबह केंद्रीय जेल परिसर का नजारा आम दिनों से बिल्कुल अलग था. हर ओर योग की लय गूंज रही थी और सैकड़ों बंदी एक साथ अनुशासन में मैट पर बैठे नजर आए. प्रशिक्षकों के निर्देश पर प्राणायाम, आसन और ध्यान करते हुए बंदी पूरी तरह योग में लीन थे. शांत, व्यवस्थित और सकारात्मक ऊर्जा से भरे इस माहौल ने जेल परिसर को मानो एक बड़े योग स्थल में तब्दील कर दिया. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में चल रहे राज्यव्यापी योग अभियान के तहत केंद्रीय जेल इंदौर में विशेष योग सत्र आयोजित किया गया है.
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विवेक रुसिया वर्चुअल माध्यम से जुड़े, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर उपस्थित रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं के महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने की. इस दौरान जेल अधीक्षक डॉ. अलका सोनकर, जेल स्टाफ और अन्य अधिकारी मौजूद रहे. योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में आयोजित सत्र में बंदियों को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक शांति का लाभ मिला. प्रदेश के सभी जिलों को भी इस कार्यक्रम से वर्चुअल माध्यम से जोड़ा गया.
न्यायमूर्ति अभ्यंकर ने जेल में नियमित रूप से चल रहे योग कार्यक्रम की सराहना की. वहीं महानिदेशक डॉ. कपूर ने योग को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया. जेल अधीक्षक डॉ. सोनकर ने कहा कि योग बंदियों के सुधार और सकारात्मक जीवनशैली विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने सभी अतिथियों और प्रशिक्षकों का आभार भी व्यक्त किया. कार्यक्रम में जेल उप अधीक्षक संतोष कुमार लड़िया, इंदर सिंह नागर, भूपेंद्र रघुवंशी, कल्याण अधिकारी अभिषेक डांगी सहित समस्त स्टाफ मौजूद रहा. सप्ताह भर चलने वाले इस योग अभियान से बंदियों के पुनर्वास को भी बल मिलेगा.
