
सिंगरौली । जिला मुख्यालय बैढ़न से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित उप तहसील पंजरेह-मोरवा के दफ्तर पिछले दो वर्षो से संचालन नही हो रहा है। आरोप है कि राजस्व अमले ने अपने सुविधानुसार पंजरेह से करीब 35 किलोमीटर दूर पचौर तहसील कार्यालय के भवन में अपना दफ्तर बना लिया है। जहां 35 से 40 किलोमीटर दूर तक के लोगों को यहां सफर करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि मोरवा का विस्थापन होने जा रहा है। देश का संभवत: सबसे बड़ा विस्थापन माना जा रहा है, लेकिन आरोप है कि राजस्व अमला इस विस्थापन के प्रति गंभीर नही है। लिहाजा मोरवा-पंजरेह क्षेत्र के हजारों विस्थापितो को रोजाना अलग-अलग तरीके से प्रमाण पत्र जिसमें पारिवारिक, कुटुम्ब, घर का हिस्सा-बटवारा, मालिकाना हक प्रमाण पत्र और नाम में भिन्नता प्रमाण पत्र, जाति, निवास सहित अन्य भू-अर्जन दस्तावेज करीब 22 से 25 हजार लोगों को इन दस्तावेजो के लिए पचौर तहसील चक्कर लगाना पड़ेगा और कुछ विस्थापितो को अपने गृह ग्राम 35 से 40 किलोमीटर दूर आना पड़ रहा है। चर्चा है कि करीब दो वर्ष पूर्व मोरवा में स्थित सर्किट हाउस में उप तहसील कार्यालय संचालित था और बकायदे कई महीनों तक नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं पंजरेह क्षेत्र के हल्का पटवारी कार्यालयीन समय में बैठते थे, परंतु अचानक दफ्तर क्यों बंद हो गया और किस अधिकारी के आदेश पर पचौर तहसील कार्यालय में पंजरेह राजस्व मंडल क्षेत्र का कामकाज चल रहा है। मोरवा के विस्थापित परिवार जहां सवाल पूछ रहे हैं, वहीं लुंजपुंज राजस्व के कामकाज पर भी उंगली उठाते हुये पंजरेह में मची अनियमितता को रोकने एवं लम्बे अर्से से पदस्थ पटवारियों को स्थानांतरित किये जाने की मांग की है।
किसके आदेश पर शुरू हुआ, किसने कराया बंद
मोरवा क्षेत्र के प्रबुद्धजन बताते हैं कि करीब दो वर्ष पूर्व लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह भवन में उप तहसील कार्यालय का संचालन हुआ। जहां नायब तहसीलदार एवं उनके अधिनस्थ अमला दफ्तर में बैठते भी थे। परंतु अचानक कुछ महीनों बाद दफ्तर अचानक बंद कर दिया गया और उस दफ्तर को पचौर तहसील भवन में संचालित करा दिया गया। सवाल उठाया जा रहा है कि यह उप तहसील कार्यालय को सर्किट हाउस विश्राम गृह में किसके आदेश पर संचालित कराया गया और किसके आदेश पर बंद कराया गया। यदि वास्तव में विस्थापितों के प्रति जिला प्रशासन की थोड़ी भी हमदर्दी है तो राजस्व मंडल का दफ्तर पंजरेह में खोला जा सकता है। मोरवा क्षेत्र के पचौर की दूरी करीब 35 से 40 किलोमीटर है। इस बीच मोरवा से बैढ़न में वाहनों का कितना दबाव है और आये दिन हादसे भी होते रहते हैं, यह बात सब को पता है। राजस्व अधिकारी अपनी सुविधा न देखे, जनता के असुविधाओं को नजरअंदाज न करें।
इनका कहना:-
मेरे जानकारी में ऐसा नही है, पंजरेह में भवन नही है, जिस कारण नायब तहसीलदार दफ्तर पचौर में संचालित, यदि पूर्व में ऐसा कोई आदेश जारी किया गया है तो उसकी कॉपी मिलने पर पालन कराया जाएगा।
सुरेश जाधव
एसडीएम, सिंगरौली
