ईरान-अमेरिका समझौते में होर्मुज़ को खोलना, तेल प्रतिबंधों में छूट शामिल, हिज्बुल्ला का जिक्र नहीं

तेहरान/वाशिंगटन, 14 जून (वार्ता) ईरान और अमेरिका के बीच तैयार हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतिम मसौदे में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में ढील, जब्त किये हुए ईरानी धन की वापसी और परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति बनाये रखने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी के अनुसार एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद अगले 60 दिनों के भीतर दोनों पक्ष अंतिम व्यापक समझौते पर बातचीत करेंगे। मसौदे के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाया गया अपना सैन्य अवरोध तत्काल हटाएगा और सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग फिर से खोल देगा। इसके बदले अमेरिका भी ईरानी बंदरगाहों पर लागू अपनी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करेगा।

समझौते के अनुसार अंतिम करार होने तक अमेरिका ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा। साथ ही वह एक निर्धारित अवधि के लिए ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में छूट देगा, जिससे तेहरान फिर से तेल बेचकर राजस्व अर्जित कर सकेगा।

अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ईरान की 25 अरब डॉलर की जब्त की हुई संपत्ति किस्तों में जारी करने पर सहमत हुआ है। इसमें प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण, क्षेत्रीय देशों के सहयोग और वित्तीय क्रेडिट लाइन जैसे विकल्प शामिल होंगे।

इसके बदले ईरान परमाणु हथियार न बनाने और न ही हासिल करने पर सहमत होगा। साथ ही अंतिम समझौते तक परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति बनाए रखेगा। इसके तहत यूरेनियम संवर्धन नहीं बढ़ाया जाएगा और न ही परमाणु सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

मसौदे के अनुसार ईरान अपने पास मौजूद उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के बड़े भंडार को कम करने पर भी सहमत हुआ है। हालांकि इसके लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर अगले 60 दिनों में चर्चा होगी और फिलहाल इसकी रूपरेखा स्पष्ट नहीं है।

ईरान लगातार परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों से इनकार करता रहा है, लेकिन उसने हथियार-स्तर के करीब तक यूरेनियम संवर्धन किया है और उसका बड़ा भंडार भी जमा किया हुआ है।

उल्लेखनीय है कि इजरायल और हिजबुल्ला के बीच लेबनान में जारी संघर्ष ईरान के लिए एक अहम मुद्दा रहा है, लेकिन समझौते के अंतिम मसौदे में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

ईरान का कहना रहा है कि किसी भी शांति समझौते के लिए दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष का समाधान भी जरूरी है। हालांकि अमेरिका और इजरायल दोनों का कहना है कि लेबनान की स्थिति ईरान के साथ चल रही वार्ता से अलग विषय है और इसका अंतिम समझौते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 

 

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