
रायसेन। शहर में दो दिनों से चल रही तहसीलदारों नाथ तहसीलदारों की अनिश्चित अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर ना तो पेशी मिली और ना सीमांकन बटवारा और फसल सर्वे नुकसान आकलन का कार्य ठप्प हो गया है।
बाढ़ प्रभावितों को मुआवजे में होगी देरी…..
हाल ही में आई बाढ़ से जिले के कई गांव,खरीफ सीजन की फसलें प्रभावित हुए हैं। इन क्षेत्रों में मकान, दुकानें और फसलें बह गईं या बर्बाद हो गईं।जिला- प्रशासन द्वारा इनका सर्वे कर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन तहसीलदारों,नायाब तहसीलदारों की बेमुद्दत हड़ताल से यह प्रक्रिया रुक गई है। अब ग्रामीणों को राहत मिलने में देरी हो सकती है।
पूरे जिले का राजस्व तंत्र ठप, लोग परेशान…..
सांचेत से प्रधानमंत्री आवास को लेकर अपने काम पर आए सतीश मैथिल,भगवान सिंह को निराश होकर लौटना पड़ा, क्यों कि ग्रामीण सांचेत राजस्व टप्पा तहसील में संबंधित अधिकारी अपनी सीट पर नहीं था। ऐसे अकेले सतीश मैथिल,भगवान सिंह ही नहीं कई ऐसे लोग थे, जो अलग-अलग काम को लेकर रायसेन शहर और ग्रामीण तहसील में आए थे। ऐसा ही नजारा सांची देवनगर सिलवानी गैरतगंज बरेली आदि में भी देखी गई। नायब तहसीलदार और तहसीलदारों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहने से पटवारी भी सरकारी काम से अपनी दूरियां बनाए रहे। उधर तहसीलदार और नायब तहसीलदार रायसेन तहसील में तंबू तानकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठे थे। इस हड़ताल से राजस्व से संबंधित कामकाज प्रभावित रहा, वहीं अतिवृष्टि से हुए नुकसान संबंधी काम भी अटका रहा।
जिले में बुधवार से तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।रायसेन जिला मुख्यालय पर तहसील कार्यालय के सामने लगे इस तंबू में अधिकारी विरोध स्वरूप डटे हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार द्वारा थोपे गए अव्यवहारिक कार्य विभाजन के निर्णय के खिलाफ यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उसे पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता। खास बात यह है कि एक दिन पहले ही जिले के सभी 22 तहसीलदार और नायाब तहसीलदारों द्वारा एकजुट होकर कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा के नाम डिप्टी कलेक्टर मनीष शर्मा,एसडीएम रायसेन को ज्ञापन सौंप दिया है। आंदोलनरत तहसीलदारों का कहना है कि सरकार द्वारा थोपे गए अव्यवहारिक कार्य विभाजन निर्णय के खिलाफ यह आंदोलन जब तक जारी रहेगा। तब तक उसे पूरी तरह से वापस नहीं लिया जाएगा। खास बात यह है कि 2 दिन पहले ही मेरे घर के तहसीलदारों नायक तहसीलदारों ने कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा को हड़ताल का अल्टीमेटम दे दिया था। तहसीलदार नायब तहसीलदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर तहसील कार्यालय तहसील राजस्व टप्पा कार्यालय राजस्व कामकाज पर असर देखने को मिल रहा है। जमीनों के नामांतरण सीमांकन ,बंटवारा, फसल बीमा भू अर्जन अधिकारियों का बुरा असर पड़ रहा है। इसमें सबसे अहम बात है कि हाल ही वके दिनों में जिले के निचले इलाकों में आई बाढ़ के कारण फसले घरों को भारी नुकसान पहुंचा है ।उसका हल्का पटवारी और तहसीलदारों द्वारा सर्वेक्षण होना है ।वह काम ठप्प पड़ा हुआ है। न्यायालय में पेशी और कामकाज पूरी तरह से बंद पड़े हुए हैं।
न्यायिक और फील्ड वर्क के बंटवारे से नाराज….
मप्र कनिष्ठ राजस्व अधिकारी संघ जिला ईकाई रायसेन के बैनर तले चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल का मुख्य कारण राज्य सरकार की नई कार्यप्रणाली है। जिसमें तहसीलदारों को दो वर्गों में बांटा गया है न्यायिक और गैर न्यायिक। एक वर्ग को न्यायिक कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है जबकि दूसरे वर्ग को गैर न्यायिक वर्ग में फील्ड में रहकर कार्य सौंपे गए हैं। इस विभाजन को तहसीलदार संघ ने अव्यवहारिक असंवैधानिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से बेहद नुकसानदायक बताया है। संघ का कहना है किजिन राजस्व अधिकारियों को फील्ड के कार्य सौंपे गए हैं।उन्हें वाहन, आवश्यक स्टाफ और संसाधनों को भी छीना जा रहा है।जो कि नीति विरुद्ध सरकार के यह फैसले हैं।
