दशकों बाद बन रहा दुर्लभ संयोग

नीमच। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या इस बार सोमवार को होने से सोमवती अमावस्या कहलाएगी। 15 जून को सोमवार के दिन मृगशिरा नक्षत्र एवं शूल-गंड योग में वृषभ उपरांत मिथुन राशि के चंद्रमा की साक्षी में अमावस्या पुरुषोत्तम मास की पूर्णता के साथ आएगी। सोमवार को अमावस्या समाप्त होते ही अधिक मास भी पूर्ण हो जाएगा। इसके बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष का आरंभ होगा।

पंडित शैलेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि इस बार अमावस्या पर बनने वाले अमृत सिद्धि योग का विशेष महत्व है। इस दिन देव, ऋषि, पितृ एवं दिव्य मनुष्य तर्पण विधान के साथ तीर्थ श्राद्ध तथा पितरों के निमित्त किए गए कामना-परक श्राद्ध का कई गुना पुण्य फल प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि मध्यरात्रि में साधना करने वाले साधकों और उपासकों के लिए भी यह समय विशेष ऊर्जा प्रदान करने वाला रहेगा। इस दृष्टि से अमृत सिद्धि योग में किए गए धार्मिक कार्यों का पुण्य अमृत तुल्य माना जाएगा। धार्मिक उपासना के लिए यह अमावस्या अत्यंत महत्वपूर्ण है। दशकों बाद इस प्रकार का शुभ संयोग बन रहा है।

दिन में सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश

पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या उदयकाल से स्पर्श में रहेगी, किंतु दर्श अमावस्या होने के कारण इसका प्रभाव पूरे दिन रहेगा। साधना, उपासना और आराधना की दृष्टि से भी यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी गई है। इसी दिन दोपहर 12:32 बजे सूर्य वृषभ राशि को छोड$कर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा।

अधिक मास में दान-धर्म नहीं कर पाए तो अमावस्या पर करें

पुरुषोत्तम मास में जो उपासक, साधक, दर्शनार्थी या यात्री किसी कारणवश दान-धर्म अथवा धार्मिक अनुष्ठानों में भाग नहीं ले पाए हों, वे इस अमावस्या पर संकल्प के अनुसार अपने इष्ट की सिद्धि और पितरों की प्रसन्नता के लिए धार्मिक कृत्य कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, श्रद्धापूर्वक किए गए छोटे-से प्रयास से भी इष्ट और पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

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