नयी दिल्ली, 14 जून (वार्ता) बेल्जियम में जन्मे प्रसिद्ध भारतीय कल्याणकारी अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज को पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में आयोजित विश्व असमानता सम्मेलन के दौरान ‘ग्लोबल इनइक्वलिटी रिसर्च अवार्ड’ (जीआईआरए) से सम्मानित किया गया। श्री द्रेज को यह सम्मान भारत में गरीबी और असमानता के मापन पर उनके अग्रणी कार्य तथा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के लिए उनकी वकालत के कारण मिला है। यह पुरस्कार प्राप्त करने के बाद श्री द्रेज ने कहा, “यह सम्मान ऐसा नहीं है, जिसे मैंने अकेले हासिल किया हो। मैं जो भी काम करता हूं, वह बदलाव के लिए काम करने वाले लोगों और समूहों के सहयोग से होता है।” श्री द्रेज ने कहा, “मैं भारत में रहता हूं और यहीं काम करता हूं, जिसे डॉ बीआर अंबेडकर ने बिल्कुल सही ढंग से ‘असमानता का संग्रहालय’ बताया था। भारत में
असमानता की हर संभव किस्में मौजूद हैं, न केवल अत्यधिक आर्थिक असमानता, बल्कि जाति व्यवस्था, भारी लैंगिक असमानता, शिक्षा तक पहुंच में भारी अंतर आदि भी। राहत की बात यह है कि भारत में असमानता के खिलाफ प्रतिरोध का भी एक समृद्ध इतिहास रहा है। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे इनमें से कुछ आंदोलनों से जुड़ने का मौका मिला।” शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो अर्थशास्त्री श्री द्रेज ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) से लागत-लाभ विश्लेषण के सैद्धांतिक अर्थशास्त्र में पीएचडी की है। उन्होंने 1980 के दशक में एसेक्स विश्वविद्यालय से गणितीय अर्थशास्त्र की पढ़ाई भी की थी। उन्होंने विकास अर्थशास्त्र के महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे भूख, अकाल, शिक्षा, लैंगिक असमानता, बाल देखभाल, मिड-डे मील और रोजगार गारंटी में गहराई से योगदान दिया है। जीआईआरए एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है, जो उन विद्वानों को सम्मानित करता है, जिनके काम ने आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय असमानताओं की समझ को बेहतर बनाया है।

