सतना: नागौद राजघराने से संबंधित परसमनिया गढ़ी में हुए गोलीकांड के बाद अगले दिन तीन वीडियो सामने आए। इनमें से एक वारदात के समय का और शेष दो घटना के बाद के बताये गए। वहीं दूसरी ओर गोली लगने से घायल बहु योगिता के भाई समेत 3 लोगों के विरुद्ध पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है। जबकि मारपीट में घायल बाबा राजा शनिवार को एमएलसी कराने के लिए जिला चिकित्सालय पहुंचे।
पहले वीडियो में रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा के साथ उनकी ससुरालवाले मारपीट करते दिख रहे हैं। उनके कपड़े पूरी तरह फट चुके हैं। इस वीडियो में गोलियां चलने की आवाज सुनाई दे रही है। गोली दीवार पर लगने के बाद धुआं भी दिख रहा है।दूसरे वीडियो में गढ़ी की गैलरी के फर्श पर खून के धब्बे और कांच के टुकड़े दिखाई दे रहे हैं। ये कांच राजघराने के पूर्वजों वाले फोटो फ्रेम के हैं, जिनसे बाबा राजा के सिर पर वार किया गया था। तीसरा वीडियो गढ़ी के ठीक बगल में स्थित पेट्रोल पंप का है, जहां सामान टूटा-फूटा और बिखरा पड़ा है।
इसी कड़ी में शनिवार को सामने आई नई जानकारी के अनुसार बहूरानी योगिता सिंह के भाई नागेंद्र सिंह राठौर निवासी उदयपुर राजस्थान और उनके दो साथियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली गई।
11जून को हुए घटनाक्रम के बाद 00:57 बजे ही रूपेंद्र सिंह द्वारा एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। लेकिन पुलिस ने इसे 24 घंटे से अधिक समय तक दबाये रखा।
गौरतलब है कि पुलिस को दिए बयान में योगिता की मां नरेंद्र कुमारी सिंह ने कहा- 11 जून की दोपहर करीब साढ़े 3 बजे योगिता और वे, उनके बेटे पृथु देव सिंह और भाई के साथ गढ़ी से अपना सामान लेने गए थे। वहां सुनीता ने गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और लाइसेंसी बंदूक से फायरिंग कर दी।
कांतिदेव सिंह के निधन से बिखराव बढ़ा
बताया गया कि जनवरी 2022 में रूपेंद्र के पिता कांतिदेव सिंह के निधन के बाद स्थितियां और बिगड़ गईं। इसके बाद उनके चाचा और विधायक नागेंद्र सिंह ने योगिता और उनके बेटे को नागौद किले में शिफ्ट करा दिया था। योगिता ने डेढ़ साल पहले भी सुनीता पर गढ़ी में मारपीट का केस दर्ज कराया था। रूपेंद्र सिंह की पत्नी योगिता सिंह भी सेना के परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता चरणजीत सिंह राठौर सेना में अफसर रहे हैं। भाई नागेंद्र सिंह राठौर भी सेना में हैं। श्रीमती योगिता तीन बार परसमनिया की सरपंच रहने के अलावा 2012 से 2016 तक भाजपा की सतना जिला उपाध्यक्ष भी रही हैं। पति से विवाद के बाद से वह अपना ज्यादातर समय बेटे के साथ मायके उदयपुर में बिता रही थीं।
एनजीओ से जुड़ी थी सुनीता
38 वर्षीय सुनीता सिंह नागौद के उमरी गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता स्वर्गीय शीतला प्रताप सिंह सेना से रिटायर हैं। मां का निधन तब हो गया था, जब सुनीता करीब 6 साल की थीं। वह 2010-11 के दौरान उमरी गांव छोड़कर नागौद में किराए के मकान में रहने लगी थीं। ग्रेजुएशन के बाद सुनीता ने महिला और बाल अधिकारों के लिए कई एनजीओ के साथ काम किया। 2013-14 में उन्होंने ‘संतोष देवी मानव विकास कल्याण समिति’ बनाई थी। सुनीता यूनिसेफ के प्रोजेक्ट्स और राज्य बाल अधिकार आयोग के साथ मिलकर भी काम कर चुकी हैं। बताया गया कि सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए सुनीता का संपर्क परसमनिया इलाके में बाबा राजा से हुआ था।
