
सीहोर/ रेहटी। खरीफ सीजन के बीच डीजल की कमी से परेशान किसानों का आक्रोश शनिवार को सड़क पर फूट पड़ा. रेहटी क्षेत्र में डीजल उपलब्ध नहीं होने से नाराज किसानों ने रेहटी-भैरूंदा मार्ग पर कृषि फार्म के सामने चक्काजाम कर दिया. किसानों ने सड़क पर अपने वाहन खड़े कर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं जिससे यातायात प्रभावित हो गया.
जानकारी के अनुसार इन दिनों खरीफ फसलों की तैयारी और कृषि कार्यों के चलते किसानों को ट्रैक्टर, पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में डीजल की आवश्यकता है. लेकिन क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में डीजल वितरण और आपूर्ति में कमी की शिकायतों के कारण किसानों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई किसान सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर पहुंच रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा है.
डीजल संकट से नाराज किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि खेती का महत्वपूर्ण समय चल रहा है और ऐसे में ईंधन की कमी से उनका काम पूरी तरह प्रभावित हो रहा है. किसानों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों को पहले से अंदाजा होना चाहिए था कि खरीफ सीजन के दौरान कृषि कार्य हेतु डीजल की मांग बढ़ेगी. इसके बावजूद पर्याप्त व्यवस्था नहीं किए जाने से किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है.
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि डीजल नहीं मिलने के कारण खेतों की तैयारी, बुवाई और अन्य कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर डीजल उपलब्ध नहीं कराया गया तो फसलों पर भी इसका असर पड़ सकता है. किसानों ने मांग की कि डीजल की आपूर्ति तत्काल बढ़ाई जाए और वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए. चक्काजाम के दौरान वाहनों की लंबी कतारें लगने से आम लोगों और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. सूचना मिलने के बाद पुलिस अमला मौके पर पहुंचा. किसानों से चर्चा कर स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास शुरू किए गए.
इस संबंध में एसडीओपी बुधनी रवि शर्मा ने बताया कि डीजल वितरण की सीमा तय होने के कारण पेट्रोल पंपों पर किसानों की भीड़ बढ़ गई है. चक्काजाम की सूचना मिलने पर पुलिस बल को मौके पर भेजा गया है. प्रशासन किसानों से चर्चा कर समस्या के समाधान का प्रयास कर रहा है.
फिलहाल किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. इस घटना ने खरीफ सीजन में किसानों को आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और प्रशासनिक तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
