
बकस्वाहा। मानसून की पहली बारिश ने ही बकस्वाहा नगर परिषद के दावों की हकीकत सामने ला दी है। नगर में हुई बारिश के बाद कई स्थानों पर नालियां ओवरफ्लो हो गईं और गंदा पानी सड़कों व गलियों में फैल गया। सबसे चौंकाने वाली स्थिति नगर परिषद कार्यालय के सामने देखने को मिली, जहां नालियों का पानी सड़क पर बहता नजर आया। जलभराव और गंदगी के कारण लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर की अधिकांश नालियों की लंबे समय से समुचित सफाई नहीं कराई गई है। नालियों में जमा कचरा और गाद के कारण बारिश का पानी निकासी नहीं पा रहा है और सड़कों पर भर रहा है। इससे आसपास के रहवासियों को बदबू और गंदगी के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
नगर के प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर के सामने भी जलभराव और कीचड़ की स्थिति बन गई है। सुबह-शाम दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गंदगी और बदबू के बीच होकर गुजरना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि इसी क्षेत्र में स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 के प्रचार बोर्ड लगे हुए हैं, जो नगर परिषद के दावों और जमीनी हालात के बीच अंतर को उजागर कर रहे हैं।
नागरिकों ने नगर परिषद प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समस्या से जिम्मेदार अधिकारी भली-भांति परिचित हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर नालियों का निर्माण भी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया, जिससे जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि नगर परिषद बारिश के मौसम में इस समस्या का स्थायी समाधान कर पाती है या नहीं।
