नई दिल्ली | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कम हो गई है। ‘यस सिक्योरिटीज’ की ताजा शोध रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में खुदरा महंगाई दर (CPI) आरबीआई के 4.2 प्रतिशत के अनुमान से कम रहने की संभावना है। अनुकूल बेस इफेक्ट के कारण पहली तिमाही का औसत महंगाई दर उम्मीद से काफी नीचे बना हुआ है।
खाद्य और ईंधन कीमतों का प्रभाव
महंगाई के आंकड़ों में भले ही मई महीने में मामूली तेजी देखी गई हो, लेकिन जून तिमाही का समग्र औसत नियंत्रण में है। हालांकि, सब्जियों की कीमतों में वृद्धि और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से परिवहन लागत में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है। इसके अलावा, होटल, रेस्तरां सेवाओं और कीमती धातुओं की कीमतों में आई तेजी ने कोर इन्फ्लेशन को प्रभावित किया है।
आरबीआई का सतर्क रुख
रिजर्व बैंक फिलहाल ‘डेटा-डिपेंडेंट’ रुख अपनाते हुए ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव से बच सकता है। हालांकि, अल नीनो का खतरा और कमजोर मानसून की अनिश्चितताओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक भविष्य की स्थिति पर कड़ी नजर रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य आपूर्ति और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बने रहने पर आरबीआई द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखना तय है।

