
जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने कहा है कि कानून जिन शक्तियों को न्यायालय के लिए सुरक्षित रखता है, उनका प्रयोग प्रशासनिक अधिकारी नहीं कर सकते। जिस पर इस सिद्धांत से जुड़े मामले में कथित अवैध कालोनाइजेशन प्रकरण में पारित कलेक्टर एवं एसडीएम के आदेशों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई जाती है। एकलपीठ ने मामले में राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
यह मामला छिंदवाड़ा निवासी जितेन्द्र चोरे की ओर से दायर किया गया था। जिनकी ओर से अधिवक्ता सौरभ शर्मा व विकास संतू ने पक्ष रखा। जिन्होंने तर्क दिया कि मध्यप्रदेश कॉलोनी विकास नियम 2021 के तहत अनधिकृत कालोनी के मामलों में निर्माण हटाने तथा डेवलपर व भूमि स्वामी के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई का प्राविधान है, जबकि दंड और जुर्माना लगाने का अधिकार सक्षम न्यायालय के पास है। याचिका में मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339-सी का हवाला देते हुए कहा गया कि अवैध कॉलोनाइजेशन के अपराध में सजा और अर्थदंड न्यायालय द्वारा ही निर्धारित किए जा सकते हैं। ऐसे में कलेक्टर और एसडीएम द्वारा की गई कार्रवाई अधिकार क्षेत्र से परे है। याचिकाकर्ता ने इसी प्रकार के पूर्व प्रकरण में दी गई अंतरिम राहत का भी उल्लेख किया। जिसके बाद न्यायालय ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए विवादित आदेशों के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी। साथ ही राज्य शासन को जवाब तथा आवश्यक होने पर स्थगन निरस्तीकरण आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी गई है।
