इंदौर: शहर में नगर निगम के ड्रेनेज सिस्टम के सारे दावे खोखले साबित हो रहे है. आज भी पूरे शहर में कान्ह सरस्वती नदी में ड्रेनेज का पानी मिल रहा है. इतना ही नहीं शहर में जहां भी नदी किनारे पेड़ लगे है, उनको काटा जा रहा है. दूसरी ओर नदी में जलकुंभी और गाद जम रही है. इन सबसे बढ़कर नदियों किनारे धड़ल्ले से अतिक्रमण भी हो रहे हैं.
शहर में नगर निगम नाला टेपिंग के दावे की हवा पूरी तरह से निकल गई है. शहर में निगम ठोस की बजाय दिखावे का काम ज्यादा कर रहा है. इसका उदाहरण है किशनपुरा से लोखंडे ब्रिज तक नदी में जलकुंभी हो गई. नदी किनारे नगर निगन ही कचरा डाल कर नदी क्षेत्र को खत्म और बर्बाद कर रहा है. रामबाग श्मशान और आगे पुलिस लाइन के तरफ अवैध रूप से पेड़ों की कटाई हो रही है. इस सबसे बढ़कर यह है कि नदी किनारे अतिक्रमण हटाने के बजाय बढ़ गया है.
किनारे पर एनजीटी के आदेश के विपरीत मकानों और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग से सारा कचरा और ड्रेनेज नदी में मिल रहा है.वैसे तो पूरे शहर की नदी में ही ड्रेनेज का पानी मिल रहा है. अभी और मिलेगा जब बारिश शुरू होगी, क्योंकि नाला टेपिंग में सारे आउट फाल बंद कर दिए जाते है और बारिश में सड़कों पर पानी भराने पर आउट फाल को खोलना ही पड़ता है. पिछले साल भी नगर निगम ने शहर में बारिश का पानी भरने पर नाला टेपिंग में बंद किए आउट फाल को खोलना पड़ा था, जब शहर में पानी खाली हुआ था.
आखों देखा हाल बताया अभियान समिति सदस्य ने
कान्ह सरस्वती पुनर्जीवित अभियान समिति सदस्य अनिल बोरगांवकर ने बताया कि नगर निगम स्वयं ही नदी किनारे कचरा डंप कर रहा है. एनजीटी के आदेश के पालन का तो सवाल ही नहीं उठता है, दोनों तरफ मकान और बिल्डिंग निर्माण है. साथ ही उनके रहवासियों द्वारा ड्रेनेज और कचरा सीधा डाला जा रहा है, यह देखने में आया है. निगम द्वारा पेड़ों को पानी नहीं दिया जा रहा है, उल्टा अवैध रूप से पेड़ काटे जा रहे है. यह हालत है एक किलोमीटर की, आप समझ सकते हैं, पूरे शहर का हाल.
कान्ह सरस्वती नदी का निरीक्षण
आज कान्ह सरस्वती नदी पुनर्जीविन अभियान समिति सदस्यों ने अहिल्या आश्रम पुल से लोखंडे ब्रिज तक पुनर्जीवित करने के उद्देश से दौरा किया. इस दौरान समिति सदस्य को हालत गंभीर खराब नज़र आए. नदी किनारे पेड़ कट रहे, नदी में जलकुंभी, नदी में अभी भी ड्रेनेज का पानी मिल रहा हैं, जैसी लापरवाही दिखाई दी. इस दौरान अनिल बोरगांवकर ,सुनील बेनवंशी, चन्द्रशेखर गवली ने नदी की बदहाली और सफाई व्यवस्था की पोल खोलने के लिए फोटो और वीडियो बनाए.
