जबलपुर: हाईकोर्ट के जस्टिस आरके वाणी की एकलपीठ ने अंतरिम आदेश के जरिए गौवंश की सुपुदर्गी पर यथास्थिति के निर्देश दिए हैं। साथ ही अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को निर्देशित किया कि लंबित पुनरीक्षण याचिका का गुण-दोष के आधार पर 30 दिनों के भीतर निर्णय किया जाए।दरअसलए 10 मई 2026 की रात बालाघाट जिले के लालबर्रा थाना क्षेत्र में पुलिस ने अमाटोला रोड स्थित अंबेडकर चौक पर कार्रवाई करते हुए छह पिकअप वाहन पकड़े थे।
पुलिस के मुताबिक वाहनों में 48 गौवंशों को कथित रूप से क्रूरता पूर्वक भरकर महाराष्ट्र स्थित स्लाटर हाउस ले जाया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान गौवंश जब्त कर वैधानिक प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस बीच न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 22 मई 2026 को गौवंशों की सुपुर्दगी का आदेश पारित कर दिया। इस आदेशों को चुनौती देते हुए गौवंश रक्षण समिति वारासिवनी के प्रशासक अभिषेक सुराना ने पुनरीक्षण याचिका दायर की। जिसका राहतकारी नतीजा न निकलने के कारण मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया कि जिन रसीदों व दस्तावेजों के आधार पर सुपुर्दगी का दावा किया गया है, उनकी प्रामाणिकता संदेह के घेरे में है। उनका कहना था कि संबंधित पक्षों को गौवंशों की कस्टडी प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार नहीं है, इसलिए सुपुर्दगी आदेश पर रोक आवश्यक है। यह सुनने के बाद हाईकोर्ट ने गौवंशों की कस्टडी में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने पर रोक लगा दी। साथ ही अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को निर्देशित किया कि लंबित पुनरीक्षण याचिका का गुण-दोष के आधार पर 30 दिनों के भीतर निर्णय किया जाए।
