मासूम के उपचार में आड़े आ रही आर्थिक तंगी..?रीवा रेफर के बावजूद घर ले गए परिजन

सतना। हृदय रोग से पीडि़त डेढ़ वर्षीय मासूम का वजन महज 4.6 किलो रह गया है. सीएचसी मझगवां से रेफर किए जाने के बाद जिला चिकित्सालय में उसका 10 दिन तक उपचार हुआ. लेकिन वहां से मेडिकल कॉलेज रीवा रेफर किए जाने पर आथिक तंगी का हवाला देते हुए परिजन मासूम को लेकर घर चले गए.प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के मझगवां विकासखण्ड अंतर्गत केल्हौरा गांव के निवासी विनोद यादव की पुत्री ज्योति यादव की उम्र डेढ़ वर्ष हो चुकी है. लेकिन इसके बावजूद भी उसका वजन महज 4 किलो 600 ग्राम ही है. बच्ची की कमजोर हालत को देखते हुए पहले कुपोषण की आशंका जताई गई. लेकिन बाद में हुई जांच में यह जानकारी सामने आई कि बच्ची हृदय रोग से पीडि़त है. पिता विनोद से मिली जानकारी के अनुसार बच्ची को उपचार के लिए मझगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था. जहां पर प्राथमिक जांच और उपचार के बाद उसे जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया गया. जिला चिकित्सालय ले जाए जाने पर बच्ची को भर्ती करते हुए उपचार शुरु हुआ. इस दौरान हुई जांच के बाद चिकित्सकों द्वारा परिजनों को बताया गया कि बच्ची के हृदय में छेद है. हलांकि इसके बावजूद भी बच्ची को 10 दिन तक बच्ची को भर्ती रखकर उपचार किया जाता रहा. लेकिन सुधार होता न देख उसे जिला चिकित्सालय से मेडिकल कॉलेज रीवा के लिए रेफर कर दिया गया. हलांकि बच्ची के बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था. लेकिन आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए परिजन इसके लिए राजी नहीं हुए और बच्ची को लेकर वापस अपने गांव चले गए.

सहायता की प्रतीक्षा

ज्योति की हालत ऐसी है कि वह न तो बैठ सकती है और न खड़ी हो सकती है. इतना ही नहीं बल्कि उसकी गर्दन उसके सिर के भार को सह नहीं पाती है. जिसके चलते उसे लेटाए रखना पड़ता है. उसकी हालत को देखते हुए मां द्वारा तेल की मालिश की जाती है. लेकिन उन्हें शायद नहीं मालुम कि महज मालिश करने से बीमारी दूर नहीं होगी. इसी कड़ी में पिता विनोद द्वारा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों समेत प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई जा रही है कि उसकी मासूम बेटी को समय रहते समुचित उपचार मिल जाए.

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