जीतू पटवारी की अग्नि परीक्षा

मालवा- निमाड़ की डायरी

संजय व्यास

भाजपा की तीसरी सीट पर भी उम्मीदवारी से मंदसौर की पूर्व सांसद व कांग्रेस से राज्य सभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को जिताना कांग्रेस की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. खेला होने की आशंका के बीच वह अपने विधायकों की कड़ी निगरानी में लग गई है. वैसे मीनाक्षी की जीत के लिए कांग्रेस के पास पर्याप्त वोटों का संख्या बल है, पर नटराजन की उम्मीदवारी के बाद जिस तरह असंतोष के सुर फूटे हैं, उसने धुकधुकी बढ़ा दी है और क्रास वोटिंग की आशंका सता रही है. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए यह चुनाव अग्नि परीक्षा है. लोक सभा चुनाव 2024 शून्य पर पहुंची पार्टी के बाद राहुल गांधी ने पटवारी के प्रति गहरी नाराजगी जताई थी. उसके पश्चात गत वर्ष राहुल गांधी के अंबेडकर समारोह में शिरकत के दौरान जीतू ने इसके लिए खेद प्रकट करने के साथ प्रदेश में पार्टी की मजबूती का राहुल गांधी को भरोसा दिलाया था. इस चुनाव में प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन राहुल की विशेष पसंद होने के कारण परिणाम राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से भी प्रभावित करेंगे. सो इससे जीतू पटवारी का भविष्य भी तय होगा. हाल की स्थिति में भाजपा को अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए 116 प्रथम वरीयता के वोट की जरूरत पड़ेगी. इसके बाद भी भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे. यानी तीसरी सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त 10 वोट की जरूरत होगी. बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का मामला डांवांडोल नजर आ रहा है. वहीं, निर्दलीय (बाप पार्टी) कमलेश्वर डोडियार का वोट अगर भाजपा उम्मीदवार को मिलता है और कांग्रेस के नौ विधायक क्रॉस वोटिंग करते हैं तो मामला पलट जाएगा. वहीं, कांग्रेस के छह विधायकों के भी क्रॉस वोटिंग करने के बाद तीसरी सीट पर फैसला दूसरी वरीयता के वोटों से होगा. इस स्थिति में भी भाजपा के फायदे में रह सकती है. ऐसे में कांग्रेस अपने विधायकों की अखंड एकजुटता के लिए उन्हें अभेद चक्रव्यूह में रखने की रणनीति पर चल रही है.

 

 

 

तो एक क्षेत्र तीन सांसद

 

 

यदि सब कुछ सही रहा और मीनाक्षी नटराजन राज्य सभा चुनाव जीतती हैं तो मंदसौर संसदीय क्षेत्र के लिए एक ऐसासंयोग बनेगा, जिसका तीन सांसद प्रतिनिधित्व कर रहे होंगे. वर्तमान में लोक सभा सांसद सुधीर गुप्ता हैं. वहीं राज्य सभा में सांसद बंशीलाल गुर्जर भी यहीं से हैं. मीनाक्षी नटराजन की जीत के बाद मंदसौर जिले से संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल तीन चेहरे दिल्ली में दिखेंगे और मंदसौर ऐसा शहर बन जाएगा, जहां से एक साथ तीन-तीन सांसद देश की संसद में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे होंगे.

 

 

 

अतिक्रमणकारियों के प्रश्रयदाताओंं पर चुनावी प्रतिबंध लगे!

 

 

कभी सागौन यानी टिक -वुड के लिए मशहूर रहा निमाड़ अब मरुस्थल जैसी गर्मी दे रहा है. बड़वानी और खरगोन जिले के आदिवासी अतिक्रमणकारी बुरहानपुर और खंडवा की सीमा रेखा पर वर्षों से पेड़ काट रहे हैं. पेड़ काटकर उपजाऊ जमीन के खेत तैयार कर रहे हैं. क्षेत्र के नेता वोट के लिए इन्हें प्रश्रय दे रहे हैं. सरकार में रहकर सरकार की पॉलिसी खराब कर रहे हैं. यहां लोकल रोहिंग्या की तरह इन्हें बसाकर आधार कार्ड, राशन कार्ड और सरकारी सुविधाएं दी जा रही हैं. अब पानी सर से ऊपर हो गया है. वन विभाग के बंदूकधारी अफसरों को भी वे पत्थरों से खदेड़ देते हैं. उन्हें पता है कि वन विभाग के वर्दी वाले गोली नहीं चला सकते, लेकिन अतिक्रमणकारी पत्थर मार सकते हैं. कुछ लोगों को हाल ही में खंडवा के गुड़ी के पास आमा खजूरी गांव में पकडऩे वन विभाग की टीम और पुलिस गई, इन्हें बैठाकर लाने लगी. जंगल कटाई के मामले में उनकी पेशी होनी थी, लेकिन आदिवासियों ने वन विभाग के अधिकारियों को खदेड दिया. उनके वाहन से अपने रिश्तेदारों को छुड़ाकर ले गए. बाद में फिर वन विभाग की टीम ने कुछ लोगों को पकड़ा. सवाल यह उठता है कि इन अतिक्रमणकारी आदिवासियों में इतनी हिम्मत कहां से आई? नेताओं और जनप्रतिनिधियों के प्रश्रय की जांच होनी चाहिए. क्या उनके चुनाव लडऩे पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता?

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