सतना: नागौद प्रगतिशील लेखक संघ ने प्रो.कमला प्रसाद स्मृति “सम्मान समारोह” के तहत प्रो. सेवाराम त्रिपाठी को “आलोचना सम्मान” प्रदान करने एवं उनकी पुस्तकों पर परिचर्चा हेतु भव्य एवं गरिमा पूर्ण समारोह प्रो.अष्टभुजा शुक्ला गोरखपुर के मुख्य अतिथ्य में आयोजित किया कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रगतिशील लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रो.सेवाराम त्रिपाठी ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से प्रो.आशीष त्रिपाठी,अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविन्द शर्मा,एसडीएम जीतेन्द्र वर्मा,डॉ.माया मिश्रा भोपाल, इंदु श्रीवास्तव जबलपुर, पद्मश्री बाबूलाल दाहिया, शिवशंकर मिश्र “सरस” सीधी, प्रलेस जिलाध्यक्ष एड.संतोष खरे की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का निर्वाध संचालन इकाई अध्यक्ष एड.रमाकान्त मिश्र वही आभार व्यक्त इकाई के महासचिव पुष्कर शरण सिंह ने किया।मुख्य अतिथि अष्टभुजा शुक्ल ने प्रो.सेवाराम त्रिपाठी को कमला प्रसाद स्मृति प्रथम “आलोचना सम्मान” प्राप्त करने के लिए बधाई देते हुए नागौद इकाई को इस परम्परा को आगे भी जारी रखने की प्रेरणा देते हुए कहा इस तरह के आयोजन पूरे वातावरण को ऑक्सीजन देने का काम करते हैं। श्री शुक्ल ने सेवाराम एवं कमला प्रसाद को एक दूसरे का पूरक बताते हुए दोनों से जुड़े कई संस्मरण सुनाते हुए कहा अपनी ही माटी में अपनों द्वारा सम्मानित किया जाना बड़ी बात है, आगे उन्होंने कहा हमें अपनी स्थानीय बोली भाषा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कार्यक्रम अध्यक्ष की आसंदी से बोलते हुए सेवाराम त्रिपाठी ने कहा मैं जिस मिट्टी से आया हूं यह उसी मिट्टी का पुण्य प्रताप है की नागौद इकाई ने मुझे यह सम्मान दिया मैं इसकी कल्पना भी नहीं करता था। डॉ. कमला प्रसाद मेरे गुरु एवं मार्गदर्शक रहे हैं श्री त्रिपाठी नें अपने विद्यार्थी जीवन से लेकर कमला प्रसाद के संस्मरण सुनाते हुए कहा आजादी के इतने वर्षों बाद भी वही भूख,गरीबी,अन्याय,धार्मिक सांप्रदायिक उन्माद चिंता का विषय है, अब भी समय है हमें इसे रोकना चाहिए।
विजयशंकर चतुर्वेदी ने सेवाराम त्रिपाठी के जीवन परिचय उनके कार्यों के उद्धरण पर विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की। वहीं डॉ. माया मिश्र ने कहा सेवाराम जी का घर साहित्य, कला एवं संस्कृति का सजीव केंद्र था यह मैंने स्वयं देखा और अनुभव किया है। आपके लेखन में विविधता है कविता व्यंग, निबंध, आलोचना के छेत्र में लिखा है पहला कविता संग्रह अंधेरे के खिलाफ है, आपकी व्यंग रचनाएँ समाज की अनेक विसंगतियों की ओर संकेत करती हैं, उनका मूल उद्देश्य समाज को आसन्न संकट के प्रति सचेत करना है, आपकी कविताएं मनुष्यता की संभावनाओं की दस्तावेज हैं।
इंदु श्रीवास्तव ने सेवाराम की बघेली पुस्तक “अंतरंग बहिरंग’ की चर्चा करते हुए कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से विंध्य की संस्कृति का विस्तार से वर्ण करते हुए लोक संस्कृति के अनुभव एवं परम्परागत ज्ञान का उल्लेख किया है। इस पुस्तक को पढ़ते हुए पांच दशक पहले का नागौद मेरी आंखों के सामने घूम गया तीर्थ यात्रा के लिए जा रहे लोगों के लिए गाए जाने वाले गीत हो चाहे चिड़ियों,जानवरों पर केंद्रित लोक कथाएं इस पुस्तक में भरी पड़ी हैं।
पद्मश्री बाबूलाल दाहिया नें कमला प्रसाद के साथ बिताए समय को स्मरण करते हुए कई संस्मरण प्रस्तुत किए और कहा हम सभी उन्हें “कमांडर” कहते थे, उनमें अदभुत संगठनात्मक क्षमता थी,उनके निधन के बाद से हम सभी साहित्यकार अनाथ सा महसूस करते हैं । वो पाकिस्तान भी गए थे और वहां के साहित्यकारों से मुलाकात किया था। शिवशंकर मिश्र सरस ने कहा कमला प्रसाद से हम सबको नई ऊर्जा मिलती थी वो सभी का ख्याल रखते थे। एड संतोष खरे ने अपने दीर्घकालीन अनुभव साझा किए .कार्यक्रम का समापन “सरस काव्य संध्या” के रूप में हुआ।
