मुजफ्फराबाद/रावलकोट, 09 जून (वार्ता) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को लेकर तनाव चरम पर है। जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इन सीटों का इस्तेमाल अपने हित साधने के लिए करती है और इन्हें खत्म करने की मांग को लेकर क्षेत्र में हिंसक विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। पीओके की यह अशांति 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच हुई है। यह विरोध-प्रदर्शन हाल के वर्षों में इलाके में हुई सबसे घातक अशांति के एक दिन बाद हो रहा है, जिसमें कम से कम 11 लोग मारे गए और 60 से अधिक घायल हो गए।
इससे अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इलाके में और अस्थिरता का डर पैदा हो गया है। रावलकोट में जेएएसी समर्थकों के एक साथी कार्यकर्ता की हत्या के विरोध में इकट्ठा होने के बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। जेएएसी आर्थिक शिकायतों, प्रशासन में सुधार और राजनीतिक मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रही है और उसने रिफ्यूजी सीटों के मुद्दे को अपने आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाया है। ‘अरब न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार गठबंधन का तर्क है कि 45 सदस्यों वाली विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों का इस्तेमाल मुख्यधारा की पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टियां इलाके में सरकार बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए करती हैं, जिससे स्थानीय लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व कमजोर होता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मारे गए लोगों में कम से कम चार सुरक्षाकर्मी शामिल थे, जबकि झड़पों के दौरान लगभग 20 अन्य लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने जेएएसी समर्थकों पर अशांति के दौरान रावलकोट में सेना द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल पर हमला करने का आरोप लगाया। ‘अरब न्यूज’ के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने आरोप लगाया कि हाल ही में प्रतिबंधित संगठन के सदस्य सरकारी संस्थानों पर हिंसक हमलों में शामिल थे। गत 5 जून को क्षेत्रीय प्रशासन ने जेएएसी को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। इस कदम ने अधिकारियों और विरोध आंदोलन के बीच गतिरोध को और बढ़ा दिया है।
पुलिस ने बताया कि बाद में सुरक्षा कार्रवाई के दौरान समूह से जुड़े 72 लोगों को गिरफ्तार किया गया। ‘अरब न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने दावा किया कि कुछ गिरफ्तार लोगों के पास हथियार, संदिग्ध दस्तावेज और ऐसी सामग्री मिली, जिसका मकसद सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डालना था।
इलाके की सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को फैसला सुनाया कि रिफ्यूजियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है और उनमें केवल संवैधानिक संशोधन के जरिए ही बदलाव किया जा सकता है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि 27 जुलाई को होने वाले विधायी चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार हों और राजनीतिक अशांति के कारण उनमें देरी न हो। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई और आतंकवाद-रोधी कानून के तहत जेएएसी पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर सवाल उठाए। मानवाधिकार संस्था ने सभी पक्षों से संयम बरतने, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करने और जनता की शिकायतों के समाधान के लिए सार्थक बातचीत करने का आह्वान किया।

