नयी दिल्ली, 08 जून (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मलेशियाई नागरिकों और कंबोडिया से संचालित साइबर ठगी के एक मामले में राजस्थान और पंजाब में सात ठिकानों पर छापेमारी कर एक बड़े सिम कार्ड फर्जीवाड़े का खुलासा किया है।
ईडी ने सोमवार को बताया कि यह मामला भारतीय मोबाइल नंबरों को फर्जी तरीके से सक्रिय कर उन्हें मलेशियाई नागरिकों को उपलब्ध कराने से जुड़ा है। आरोप है कि इन नंबरों का इस्तेमाल कंबोडिया से संचालित होकर देश में साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था।
एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच की शुरुआत जोधपुर के साइबर पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की थी। मामला कुछ पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) विक्रेताओं द्वारा सिम कार्ड के दुरुपयोग से जुड़ा है।
जांच में सामने आया कि देश में सिम विक्रेताओं ने हजारों मोबाइल नंबर फर्जी तरीके से सक्रिय किये और बाद में उनका इस्तेमाल कंबोडिया से विभिन्न राज्यों में व्हाट्सएप कॉल के जरिये साइबर ठगी करने में किया गया।
करीब 2.30 लाख मोबाइल नंबरों के विश्लेषण में पाया गया कि लगभग 36 हजार सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय थे। इनमें से करीब 5300 नंबर ऐसे मामलों से जुड़े मिले जिनमें देशभर में लोगों से सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की गयी।
ईडी के अनुसार आरोपी राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट ने अन्य सिम विक्रेताओं प्रकाश भील, रामअवतार राठी, हरीश मालाकार और हेमंत पंवार के साथ मिलकर सैकड़ों सिम कार्ड मलेशियाई नागरिकों को उपलब्ध कराये।
जांच में पता चला कि आरोपी एयरटेल, जियो और वीआई जैसी दूरसंचार कंपनियों से प्राप्त पीओएस आईडी का इस्तेमाल कर सिम कार्ड जारी और सक्रिय करते थे। वे कम पढ़े-लिखे और भोले-भाले लोगों को मोबाइल नंबर पोर्ट कराने या नया सिम दिलाने का झांसा देते थे। इस दौरान उनकी जानकारी के बिना अतिरिक्त सिम कार्ड सक्रिय कर लिये जाते थे और बाद में पैसे के बदले मलेशियाई नागरिकों को सौंप दिये जाते थे।
छापेमारी के दौरान ईडी ने कई अहम दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है। जांच एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े करीब 30 बैंक खातों का भी पता लगाया है। इसके अलावा अपराध से अर्जित धन से जुड़ी चल-अचल संपत्तियों की जानकारी भी सामने आयी है। मामले की आगे की जांच जारी है।
