यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश करें मिलकर काम : शाह

नयी दिल्ली 08 जून (वार्ता) केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यमुना की सफाई की महत्वाकांक्षी योजना को सफलतापूर्वक पूरा करने को सरकार का संकल्प बताते हुए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों तथा सभी संबंधित मंत्रालयों से यमुना की स्वच्छता के लिए टुकड़ों में नहीं बल्कि टीम भावना से एकीकृत कार्य योजना के तहत काम करने को कहा है।

श्री शाह ने यमुना को प्रदूषण मुक्त करने तथा इसे स्वच्छ बनाने की सरकार की योजना को लेकर सोमवार को यहां एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने इस परियोजना की कार्य प्रगति की हर 20 दिन में समीक्षा करने को भी कहा। उन्होंने कहा ,” साफ और स्वच्छ यमुना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा संकल्प है और हम सभी को मिलकर इससे जल्दी ही पूरा करना है। ”

गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सरकारों तथा सभी संबंधित मंत्रालयों को यमुना की स्वच्छता के लिए टुकड़ों में नहीं बल्कि एक टीम भावना से एकीकृत कार्य योजना के तहत काम करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश तीनों राज्य मिलकर यमुना नदी में ” मानक ईको-फ्लो” सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करें।

श्री शाह ने इस अवसर पर कहा कि दिल्ली की डेयरियों के कचरे को यमुना में जाने से रोकने के लिए दिल्ली नगर निगम और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जायेंगे । इस समझौते के तहत कचरे को गोबर गैस तथा खाद में तब्दील करने का काम किया जायेगा। उन्होंने कहा कि डेयरी और गौशालाओं का गोबर सीधे गैस और खाद प्लांट तक पहुंचाया जायेगा और यमुना किनारे के कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि यमुना नदी में प्रवाहित नालों की गाद निकालने का काम तेजी से चल रहा है। इस वर्ष लक्षित 28.57 लाख टन में से 97 प्रतिशत गाद निकाली जा चुकी है बाकी 15 जून तक निकाल ली जाएगी। इस गाद का इस्तेमाल विभिन्न विनिर्माण परियोजनाओं में किया जायेगा जिससे बारिश में यह बहकर वापस यमुना में ना जाये।

गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में अब तक 128 सीवेज उपचार संयंत्र बन चुके हैं और 2027 के अंत तक 99 नए और बनाये जाएँगे। उन्होंने यमुना में जुड़ने वाले सभी नालों और जल स्रोतों में शुद्धिकरण के विभिन्न पैमानों की निरंतर निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की कार्य प्रगति की हर 20 दिन में समीक्षा की जानी चाहिए।

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