विंध्य की डायरी
डॉ रवि तिवारी: आमतौर पर नेता किसी ऐसे ओहदे की तलाश में रहते हैं जिससे उनका राजनैतिक कद और भविष्य दोनों सुरक्षित हो सके.इस बार विचित्र संयोग रहा है. विंध्य में विकास की धारा को अविरल बनाने के लिए विंध्य विकास प्राधिकरण में राजनैतिक नियुक्ति ऐसे समय हुई जब प्रधानमंत्री ने सरकारों से अपने खर्च को नियंत्रित करने की अपील कर दी.नेताओं ने भी सोचा था कि इस नियुक्ति से आगे के राजनैतिक सफर को सुगमता से आगे बढ़ाएगे. पर बिना दिखावा सूने माहौल में हुए कार्यभार ग्रहण की औपचारिकता ने सपनों के लंबे चौड़े संसार को हासिए में लाकर खड़ा कर दिया है.
बिना मजमा,बिना जुलूस हुए इस कार्यक्रम की स्थिति यह थी कि कोई विधायक या सांसद इस मौके पर खुशी व्यक्त करने भी नहीं पहुँचा. कमिश्नर कार्यालय में हुए इस कार्यक्रम के दौरान समर्थक भी नहीं पहुँच पाए . अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष को बैठाकर सारी सरकारी खानापूर्ति कर दी गई.विकास की कल्पना को अमलीजामा पहनाने वाली इस संस्था की इस प्रकार की खानापूर्ति के तरह-तरह के मायने अभी से निकाले जाने लगें हैं. दल के लोग भी इसको लेकर अपने तर्क गढ़ रहे हैं. कुलमिलाकर नए पदाधिकारियों ने सादगी अपनाकर अपने अंक तो बढवा लिए .आगे क्या,कैसे होगा यह समय ही बताएगा.
रार ने चर्चा को दी हवा
सतना नगर निगम में महापौर और निगमायुक्त के बीच रार ने चर्चा के बाजार को गर्म कर दिया.इंजीनियरों के प्रभार को लेकर शुरू हुई इस रणनीतिक जंग में कलेक्टर को ज्ञापन सौपने के घटनाक्रम ने कमजोर राजनैतिक पकड़ को स्पष्ट कर दिया.यह संयोग ही हैं कि इसके पहले सांसद ने भी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लेकर मुख्यमंत्री तक की पहल की थी.फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई थी.चर्चा तो यह भी हैं कि इस बार भी मामला प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री तक जा चुका है. इस मामले में ऊपरी तंत्र की चुप्पी निचले कर्ताधर्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गई .हालत यह है कि प्री-मानसून की बारिश में हुए जल जमाव के लिए सफाई कामगारों की भर्ती न होने को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. अब देखना यह है कि सिस्टम और जनसेवकों की इस रणनीतिक जंग में कौन किसकी पीठ थपथपाता है.
किसानों का विरोध और राजनीति
आदिवासी बहुल जिले सीधी में किसानों को मुआवजा दिए बिना टॉवर लगाए जाने का मामला गम्भीर होता जा रहा है. चुरहट विधायक पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इसी मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिख मुआवजे की सियासत को गरमा दिया है. पत्र में उन्होंने चेतावनी देते हुए यह अपेक्षा की है कि किसानों की मांगों पर ध्यान दिया जाए नहीं तो कांग्रेस को विवशता में कोई दूसरा कदम उठाना पड़ेगा
