तेहरान, 6 जून (वार्ता) ईरान के सर्वोच्च नेता के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार अली अकबर विलायती ने कहा है कि स्थायी शांति केवल शक्ति संतुलन के माध्यम से ही हासिल की जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने विरोधियों के साथ किसी भी तरह के समझौते या “खोखले वादों” पर भरोसा करने के खिलाफ चेतावनी दी है। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में श्री विलायती ने कहा कि ईरान के बढ़ते प्रभाव को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताएं अब हकीकत में बदल चुकी हैं और वैश्विक स्तर पर “शक्ति का एक नया ढांचा” उभर कर सामने आया है। उन्होंने पश्चिमी मीडिया की उन रिपोर्टों का हवाला दिया जिनमें कहा गया है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक अस्थायी समझौते की कोशिश कर रहा है।
विलायती ने इसे “ईरान को डराने की नीति की विफलता” और “प्रतिरोध की जीत” के रूप में वर्णित किया। श्री विलायती ने क्षेत्रीय ताकतों को राजनीतिक समझौते के जरिए अपने प्रतिरोध को कमजोर न करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक कल्पनाओं की भारी कीमत चुकानी पड़ती है और टिकाऊ शांति “मृगतृष्णा जैसे वादों” के बजाय केवल आपसी शक्ति संतुलन से ही पैदा होती है। उनके इन बयानों को परोक्ष रूप से लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने हाल ही में हिजब्बुलाह को नि:शस्त्र करने की मांग की थी और क्षेत्रीय संघर्ष में ईरान की भूमिका की तीखी आलोचना की थी।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति औन ने ईरान पर अमेरिका के साथ अपनी बातचीत में लेबनान का इस्तेमाल एक “सौदेबाजी के मोहरे” के रूप में करने का आरोप लगाया था। सीएनएन को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने हिजब्बुलाह के मुख्य समर्थक ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ को संबोधित करते हुए कहा था, “यह आपका देश नहीं है, यह हमारा देश है।” श्री औन ने यह भी कहा था कि ईरान हमारी मदद करने की कोशिश नहीं कर रहा है, बल्कि उसके अपने हितों के लिए लेबनान के लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं। लेबनान के राष्ट्रपति औन परिस्थितियों के कारण यह कड़े कदम उठाने पर मजबूर हुए हैं। ईरान और अमेरिकी वार्ताओं ने लेबनान को इस व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में और अधिक उलझा दिया है, क्योंकि ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते के लिए लेबनान से इजरायल की पूर्ण वापसी की शर्त रख दी है। इस बीच, परमाणु मुद्दे के मुख्य गतिरोध बने रहने के कारण ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन पर बातचीत जारी है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि केवल अमेरिका और चीन के पास ही ईरान के भूमिगत परमाणु स्थलों से संवर्धित यूरेनियम को बाहर निकालने की क्षमता है, क्योंकि हालिया हमलों में ये ठिकाने इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं कि वहां से सामग्री की बहाली बेहद कठिन होगी।

