नरम मुद्रास्फीति को देखते हुए रेपो दर में कटौती कर सकता है आरबीआई: विशेषज्ञ

नयी दिल्ली, 12 सितंबर (वार्ता) खुदरा मुद्रास्फीति के लगातार कम रहने के मद्देनजर उद्योग, बैंकिंग और निवेश विशेषज्ञों ने उम्मीद जतायी है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चालू वित्त वर्ष में रेपो तथा अन्य नीतिगत दरों में और कटौती कर सकता है।

उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष हेमंत जैन ने कहा कि मुद्रास्फीति में कमी और जीएसटी 2.0 सुधारों से उत्पादन लागत कम होगी जिससे दाम और कम होंगे और उपभोग बढ़ेगा।

बाजार अध्ययन एवं साख निर्धारक एजेंसी क्रिसिल की मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति के शून्य से नीचे बने रहने और जीएसटी दरों में कटौती के कारण एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अपना अनुमान 3.5 प्रतिशत से कम करके 3.2 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे रिजर्व बैंक के पास एक बार और नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती का मौका है। डीबीएस बैंक की कार्यकारी निदेशक राधिका राव ने कहा कि इस स्तर पर मुद्रास्फीति नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय नहीं है। आने वाले समय में जीएसटी दरों में कटौती को देखते हुए महंगाई दर कम बनी रहेगी।

पीएल कैपिटल के अर्थशास्त्री अर्श मोगरे ने कहा कि दीर्घावधि बॉन्ड पर रिटर्न मजबूत है और ऐसे में महंगाई दर में जारी नरमी से संभवतः चालू वित्त वर्ष में केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में कटौती टाल सकता है, लेकिन अगले वित्त वर्ष में कटौती की संभावना है।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति आरबीआई के अनुमान से कम से कम 0.50 प्रतिशत कम रहेगी। इससे केंद्रीय बैंक के पास नीतिगत दरों में और कटौती की गुंजाइश बन जाती है।

 

 

 

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