सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश पर स्थगन से इंकार

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने अपने उस आदेश पर अंतरिम स्थगन देने से इंकार कर दिया, जिसमें जबलपुर कलेक्टर व नगर निगमायुक्त को निर्देश दिया गया था कि यदि गोलबाजार की सरकारी भूमि में अतिक्रमण पाया जाए तो 22 जून या उससे पहले हटाया जाए। जस्टिस प्रणय वर्मा व जस्टिस जेके पिल्लई की युगलपीठ ने पार्षद अयोध्या तिवारी सहित अन्य को अंतरिम राहत नहीं दी । कोर्ट ने ग्रीष्मावकाश के बाद मूल बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई की व्यवस्था देते हुए अगली सुनवाई 19 जून को निर्धारित की है।

हस्तक्षेपकर्ता जबलपुर निवासी अमित जैन की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा ने न्यायालय को बताया कि पुनरीक्षण याचिकाकर्ता जयदीप शाह के घर के सामने गोलबाजार में लगभग 12800 वर्ग फिट का एक भूखंड है। यह सरकारी भूमि है। जिस पर स्थानीय पार्षद अयोध्या तिवारी ने अतिक्रमण कर लिया है। इस संबंध में राज्य सरकार और नगर निगम को अभ्यावेदन दिया गया है। जिसके जरिए मांग की गई है कि अयोध्या तिवारी और अन्य लोगों द्वारा सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाया जाए। लेकिन नगर निगम व राज्य शासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कोर्ट ने विगत सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा था कि यदि याचिकाकर्ता इस संबंध में तीन दिनों के भीतर कलेक्टर व आयुक्त नगर निगम को अभ्यावेदन देता है, तो वे निर्णय लेंगे। सबसे पहले, वे यह पता लगाएंगे कि कथित सरकारी भूमि वास्तव में सरकारी भूमि है या नहीं। और यदि यह पाया जाता है कि यह सरकारी भूमि है, तो वे 30 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने के लिए सभी कदम उठाएंगे। वे 22 जून, 2026 को या उससे पहले अतिक्रमण हटा देंगे। इसी आदेश पर अंतरिम स्थगन के लिए अयोध्या तिवारी, उनके दो भाइयों व मां की ओर से अर्जी दायर की गई थी। उल्लेखनीय है कि इस मामले में नगर निगम द्वारा 11 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्वामित्य एवं भवन निर्माण की जानकारी देने को कहा गया है।

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