
उज्जैन:धर्मनगरी में इन दिनों अधिक मास के चलते सप्तसागर पूजन और 84 महादेव यात्रा का अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुण्य लाभ लेने पहुंच रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा कई स्थानों पर कैनोपी, टेंट और शामियाने लगाए गए, ताकि दर्शनार्थी धूप से बच सकें। जिन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को छांव देना था, उन्हीं पर अब वाहनों ने कब्जा जमा लिया है।
यात्रियों के लिए बनाई गई छांव के नीचे ई-रिक्शा, ऑटो और निजी चार पहिया वाहन खड़े किए जा रहे हैं। श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे तपती धूप में खड़े रहने को मजबूर हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे गर्मी से परेशान होकर बीमार पड़ रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि जिन स्थानों पर उन्हें कुछ पल राहत मिलनी चाहिए थी, वहां अब वाहन चालकों ने अस्थायी पार्किंग बना दी है।
अधिक मास में भी वाहन चालकों के मनमानी
अधिक मास में सप्तसागर स्नान और 84 महादेव यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। ऐसे समय जब श्रद्धालु आस्था और विश्वास लेकर उज्जैन पहुंच रहे हैं, वहीं कुछ लोक परिवहन चालकों की मनमानी यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है। प्रीपेड बूथ व्यवस्था होने के बावजूद कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर मनमाना किराया वसूला जा रहा है। श्रद्धालुओं से बहस और दबाव बनाकर अधिक धन लिया जा रहा है, जिससे बाहर से आए यात्रियों में नाराजगी बढ़ रही है। यात्रा मार्गों पर अव्यवस्थाओं की तस्वीर भी सामने आने लगी है।
सप्तसागरों के आसपास कई जगह पूजा सामग्री और कचरा बिखरा दिखाई दे रहा है। 84 महादेव के अनेक प्राचीन मंदिर संकरी गलियों में स्थित हैं, जहां भारी भीड़ के कारण आवाजाही प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर पेयजल, छांव और विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाएं भी अपर्याप्त नजर आ रही हैं। लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने से श्रद्धालु थकान और गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। लेकिन वाहन चालकों को इन पर दया नहीं आती है। जबकि गर्मी में लोग प्याऊ खोलकर प्यासों को पानी पिलाकर पुण्य अर्जित करते हैं।
कैनेपी के नीचे वाहन-श्रद्धालुओं की उपेक्षा
धार्मिक नगरी में उमड़ रही आस्था की इस भीड़ के बीच अब आवश्यकता इस बात की महसूस की जा रही है कि जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से सख्ती से व्यवस्था संभाले। कैनोपी और टेंट के नीचे वाहन खड़े करने वालों पर कार्रवाई हो, प्रीपेड परिवहन व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए और श्रद्धालुओं के लिए छांव, पेयजल तथा सुचारु दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उज्जैन केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु सम्मान, सुविधा और सहज दर्शन की अपेक्षा लेकर आता है। ऐसे में व्यवस्थाओं पर कब्जा और यात्रियों की परेशानी कहीं न कहीं धार्मिक भावना को भी आहत कर रही है।
