नयी दिल्ली 02 जून (वार्ता) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना ने हवा-से-सतह पर मार करने वाली रूद्रम-II मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। रूद्रम -II भारत की अगली पीढ़ी की स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल है।
रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि बेहद कठिन परिस्थितियों और महत्वपूर्ण ट्रेजेक्ट्री के तहत किए गए परीक्षण के दौरान सभी उप-प्रणालियों की क्षमता की पुष्टि हुई।
मिसाइलों को दागे जाने के बाद अत्यंत सटीकता के साथ पहले से तय लक्ष्य की ओर निर्देशित किया गया। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज के विभिन्न रेंज उपकरणों के आंकडों से इस बात की पुष्टि हुई कि परीक्षण के सभी उद्देश्य पूरे हुए हैं।
रूद्रम -II को हैदराबाद स्थित ‘रिसर्च सेंटर इमारात’ (आरसीआई) द्वारा विकसित किया गया है। आरसीआई ने डीआरडीओ की सहयोगी प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर यह मिसाइल विकसित की है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन सफल उड़ान परीक्षणों के लिए डीआरडीओ ,वायु सेना , सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग जगत के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इन परीक्षणों ने स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता को प्रदर्शित किया है, जो उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान है।
डीआरडीओ के अध्यक्ष ने भी इस सराहनीय उपलब्धि के लिए परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों को बधाई दी है।
