सतना : घरों से निकलने वाले ऑर्गेनिक कचरे को लोग अमूमन फेंक देते हैं, लेकिन शहर के 16 वर्षीय छात्र अजयदीप सिंह ने इसी कचरे से एक अनूठा ‘न्यूट्रास्यूटिकल ब्लेंड’ तैयार किया है। भोपाल के द संस्कार वैली स्कूल में 12वीं के छात्र अजयदीप के इस शोध को भारत सरकार से पेटेंट और कॉपीराइट मिल चुका है। साथ ही, प्रतिष्ठित अमेरिकी रिसर्च जर्नल ने भी उनके इस शोध को प्रकाशित कर अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी है।
डॉ. अमित सिंह के पुत्र अजयदीप ने सब्जियों के छिलकों, चायपत्ती और जड़ी-बूटियों के अवशेषों से यह फॉर्मूला तैयार किया है।आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के संगम से बने इस उत्पाद को ‘न्यूट्रिसाइकिल’ कैप्सूल के रूप में बाजार में उतारा गया है। इसके लिए महज 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी कंपनी ‘दीक्षित हर्बल्स प्राइवेट लिमिटेड’ भी स्थापित की है।
दावा है कि यह उत्पाद 55 से अधिक स्वास्थ्य समस्याओं और शरीर की 9 प्रमुख प्रणालियों के लिए लाभकारी है।छात्र के इस शोध पर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, सतना सांसद गणेश सिंह, सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा और सीएसआईआर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने उन्हें बधाई दी है।
